बिहार की राजनीति में युवाओं की भागीदारी पर छिड़ी बहस!

बिहार की राजनीति में एक बेहतरीन बहस उस समय छिड़ गयी जब 5 मई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजनीति में युवाओं की भागीदारी पर एक बड़ा सवाल खडा कर दिया. उन्होंने युवा जदयू के प्रोग्राम में कहा कि युवा राजनीति में अपने बलबूते नहीं आ रहे, बल्कि जो भी युवा राजनीति में आ रहे हैं, वे अपने राजनीतिक संपर्क व परिवार की बदौलत आ रहे हैं. उनका उद्देश्य पद प्राप्त करके व्यक्तिगत फायदा कमाना है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

बिहार का वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व चाहे वो नीतीश कुमार हों, लालू यादव हों या फिर सुशील मोदी हों, जेपी आन्दोलन की भट्टी से तप कर निकले हैं, पर बिहार की वर्तमान राजनीति में युवाओं की पौध राजनेताओं के परिवार से निकली है, यह चिंता की बात है, क्योंकि राजनीति कोई परचून की दूकान नहीं. समाज के प्रति सरोकार है, इस जिम्मेदारी से हर युवा का सरोकार है.

जब बिहार में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चिंतन होना चाहिए था, तो पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे व्यक्तिगत तौर पर ले लिया और नीतीश कुमार पर शब्द प्रहार करने में व्यस्त हो गए. मानो किसी ने उनकी पूंछ पर पैर रख दिया हो.

उन्होंने नीतीश कुमार को चैलेंज करते हुए कहा कि वे बताएं कितने युवाओं को उन्होंने राजनीति में मौका दिया है? और अगर वे राजनीतिक परिवार के युवाओं के राजनीति में आने को गलत मानते हैं, तो क्या वे स्टांप पेपर पर लिख कर देने को तैयार हैं कि उनका पुत्र भविष्य में राजनीति में नहीं आएगा?

तेजस्वी यादव के 26 साल की उम्र में बिना किसी राजनीतिक अनुभव के, बिहार के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में इस पर अच्छी खासी चर्चा हुई. लोगों ने इसे परिवारवाद और व्यक्तिपूजा का उदहारण माना. राजद में कई अनुभवी नेताओं के होने के बाद भी उन्हें हाशिये पर रखते हुए अनुभवहीन तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री बनाना खुद राजद के लोगों को नागवार गुजरा और कई राजनीति पंडितों ने और राजद नेताओं ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर लालू परिवार में भविष्य में राजनीतिक द्वंद्व शुरू होने की भविष्यवाणी की. लालू यादव के इस कदम की भरसक निंदा हुई थी और इसे लोहिया और जेपी के आदर्शों की खुलेआम ह्त्या के रूप में इसे देखा गया. जबकि उसी जेपी आंदोलन की उपज लालू यादव रहे हैं.

प्रदेश में महागठबंधन के बिखरने के बाद और उपमुख्यमंत्री पद से हटने के बाद तेजस्वी यादव नीतीश कुमार पर लगातार व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं. ट्विटर, प्रिंट मीडिया, अपने संवाददाता सम्मेलनों और चुनाव प्रचार में उनका एकमात्र एजेंडा नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत हमला रहा है. यह उनमें परिपक्वता की कमी, बिहार की समस्याओं के प्रति जानकारी का अभाव और राजनीतिक महत्वाकांक्षा की ओर इशारा करता है.

बेहतर हो कि तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के द्वारा उठाये सवाल पर सकारात्मक टिप्पणी दें और बिहार के विकास के लिए अपना विज़न प्रस्तुत करें क्योंकि बिहार को नये युवा नेताओं की जरूरत है और साथ ही बिहार के विकास के लिए फ्रेश विजन की भी.

तेजस्वी यादव के पास मौका है यह साबित करने का कि प्रजातंत्र में राजतंत्र नहीं लाया जाना चाहिए. जनता को अधिक से अधिक आप्शन मिले.


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