RSS के कार्यक्रम में बोले प्रणब मुखर्जी, विभिन्न धर्म, भाषा , संस्कृति का मिलन ही भारतीय सभ्यता की खूबसूरती

नागपुर : पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज यहां कहा कि मैं यहां आपके बीच हूं तो इसलिए कि मैं अपने दृष्टिकोण से राष्ट्र, राष्ट्रीयता और देशभक्ति को भारत के संदर्भ में आपको बता सकूं. प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए यहां पहुंचे थे. सबसे पहले उन्होंने डाॅ हेडगेवार और गोलवरकर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारे देश की पहचान कई संस्कृतियों के मिश्रण से बनी है. हमारे देश में कई धर्मों और मत के लोग एकसाथ रहते हैं. यह हमारे देश की खास विशेषता है, जो हमें धैर्यवान बनाती है.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत की राष्ट्रीयता ना तो बहुत विशेष, ना आक्रामक और ना ही विध्वंसक है. यह वह राष्ट्रीयता है जिसका वर्णन पंडित नेहरू ने अपनी किताब डिस्कवरी अॅाफ इंडिया में किया है. मेरा ऐसा मानना है कि हमारे देश की राष्ट्रीयता उस समिश्रण से बनी है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी संप्रदाय के मानने वाले शामिल हों.

प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में गुप्तकाल से लेकर सम्राट अशोक, मुगलकाल और ईस्ट इंडिया कंपनी की भी चर्चा की. इससे पहले आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि हमने डाॅ प्रणब मुखर्जी को सहज रूप से आमंत्रित किया और वे हमारा स्नेह पहचान कर आमंत्रण को स्वीकार किया. उनको कैसे बुलाया और वे कैसे आ रहे हैं जैसी चर्चा निरर्थक है.

प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के हेडक्वार्टर में जाकर उन्हें आईना दिखा दिया है. वे वहां क्यों गये से ज्यादा महत्वपूर्ण है यह सुनना कि उन्होंने वहां क्या कहा. मुखर्जी ने कहा कि भारतीय सभ्यता की विशेषता ही यह है कि हम सभी धर्मों , भाषाओं और संप्रदाय के लोगों को साथ लेकर चलते हैं.

गौरतलब है कि डाॅ मुखर्जी के भाषण को लेकर कुछ दिनों से विवाद चल रहा था, यहां तक कि उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी उन्हें आगाह किया था कि उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए क्योंकि लोग यह तो भूल जायेंगे कि उन्होंने वहां क्या कहा, लेकिन यह नहीं भूलेंगे कि कहां कहा.


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