देश में 87 प्रतिशत महिलाएं नहीं जानती पीरियड्‌स क्यों आता है!

माहवारी, पीरियड्‌स या Menstruation एक बॉयोलॉजिक प्रक्रिया है, जिसकी जरूरत मानव प्रजनन में होती है. बावजूद इसके एक हौवा बनाकर रखा गया है और हमारे समाज में आज भी इस संबंध में जानकारी का घोर अभाव है. पुरूषों की बात तो छोड़ दें महिलाएं भी इस संबंध में बात नहीं करना चाहती हैं. अगर पीरियड्‌स पर कोई चर्चा होती है या टीवी पर कोई विज्ञापन आता है तो लोग असहज से हो जाते हैं.

जबकि हमारे देश में महिलाओं की जितनी जनसंख्या है उसका 52 प्रतिशत हर महीने इससे रूबरू होता है. गौर करने वाली बात यह है कि महिलाओं की 87 प्रतिशत आबादी यह नहीं जानती है कि आखिर उन्हें पीरियड्‌स आता क्यों है और इसकी जरूरत क्या है. यह स्थिति सिर्फ ग्रामीण इलाकों की ही नहीं है बल्कि शहरी क्षेत्रों की भी यही हालत है.

चौंकाने वाली बात यह है कि जो महिला दो-तीन बच्चों की मां है, वह भी इस बायोलॉजिक प्रक्रिया के बारे में नहीं जानती हैं और इसे एक बीमारी ही समझती हैं. marginalised.in के साथ बातचीत में वे वे सिर्फ यही बता पायीं कि यह हर महीने होता है जब लड़कियां बड़ी हो जाती हैं. चार-पांच दिनों तक शरीर से खून जाता है.
किशोरियों को उनके परिवार में पीरियड्‌स के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती है. 10 प्रतिशत लड़कियां यह मानकर चलती हैं कि यह कोई बीमारी है, जिसे उन्हें अब झेलना होगा.

मात्र 13प्रतिशत लड़कियां ही देश में ऐसी हैं जो पीरियड्‌स आने से पहले इससे परिचित होती हैं. यहां तक कि स्कूल जाने वाली 56 प्रतिशत लड़कियां भी इस बारे में कुछ नहीं जानती और ना ही इस संबंध में उन्हें स्कूल में कोई जानकारी दी जाती है.

चौंकाने वाली बात यह है कि हमारे देश में अभी भी पहले पीरियड्‌स से पहले 66 प्रतिशत तक लड़कियां इसके बारे में कुछ भी नहीं जानती हैं, कहने का आशय यह है कि उन्हें इस बारे में घरों और स्कूलों में कुछ नहीं बताया जाता है, मानों पीरियड्‌स कोई छुपाने वाली चीज हो.


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