बाल श्रम निषेध दिवस : बिहार के 51 प्रखंडों को बाल श्रम मुक्‍त कराने का लिया गया संकल्प

पटना : सभी बच्‍चों को सुरक्षित और बेहतर बचपन देना उनके विकास के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण है. बिहार सरकार, राज्‍य को बाल श्रम मुक्‍त कराने के लिए प्रतिबद्ध है और हम जल्‍द ही पूरे राज्‍य को बाल श्रम मुक्‍त करवाने की दिशा में कार्य करेंगे. उक्त बातें विजय कुमार सिन्हा मंत्री श्रम संसाधन विभाग ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर कही.

गौरतलब है कि बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जागरूकता फैलाने के लिए प्रति वर्ष 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है. इस अवसर पर श्रम संसाधन विभाग ने यूनिसेफ के सहयोग से बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न संगठनों के साथ परामर्शी कार्यशाला का आयोजन किया. इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में 51 चयनित प्रखंडों को बाल श्रम मुक्‍त करने के लिए रणनीति और दिशानिर्देश को अंतिम रूप देना था.

मौके पर श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि हमें बाल मजदूरी के रोकथाम के प्रयासों और ‘पुनर्वास प्रक्रिया’ के बीच अंतर करने की जरूरत है. उन्होंने अंतर विभागीय समावेशन पर जोर दिया और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से सहयोग के साथ ही समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, गृह (पुलिस), ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग और एससी-एसटी कल्याण विभाग को सम्‍मिलित रूप से इन 51 प्रखंडों पर बाल श्रम से मुक्‍ति हेतु ध्यान केंद्रित करने को कहा.

यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ मंसूर कादरी ने कहा एक सक्षम माहौल बनाने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि बच्चे आजीविका के साधन के रूप में श्रम करने की बजाय स्कूल जायें. लंबे समय तक बाल श्रम का बच्चों पर प्रतिकूल मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और उनका गरीबी के चक्र से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. कार्यशाला में सेव द चिल्ड्रेन के प्रोग्राम मैनेजर राफे हुसैन ने कहा कि इस तरह की एक योजना की आवश्यकता है, लेकिन बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दों को संबोधित करने में इससे जुडें कार्यक्रमों में एक गति बनाये रखना भी आवश्‍यक है.


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