बिहार में हर मौसम के लिए धान की नयी किस्म शीघ्र उपलब्ध होगी

पटना: मनिला स्थित कृषि विज्ञानं संस्थान इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने धान की ऐसी किस्म विकसित की है, जो बिहार के बाढ़ ग्रस्त इलाकों के साथ सूखाग्रस्त इलाकों में भी अच्छी पैदावार दे सकती है. इंस्टिट्यूट के पांच वैज्ञानिकों का दल पटना में कृषि मंत्री प्रेम कुमार से मिला और इस किस्म के बारे में जानकारी दी. धान की नयी किस्म न केवल बेहतर पैदावार देने में सक्षम है, बल्कि इसमें पौष्टिकता भी ज्यादा है.

प्रेम कुमार ने कृषि वैज्ञानिकों की टीम को बताया कि बिहार के 21 जिले बाढ़ के खतरे का सामना करते हैं, वही बाकी जिले सूखाग्रस्त हैं. प्रेम कुमार ने बताया कि उत्तर बिहार के किसान धान की ऐसी किस्म चाहते हैं, जो बाढ़ के समय पानी की तेज धार के सामने खड़ा रह सके, वही सूखाग्रस्त जिलों में धान की वैसी किस्म चाहिए, जो कम सिंचाई में अच्छी पैदावार सुनिश्चित कर सके.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की बाढ़ ने 8.4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले धान की फसल का नुकसान किया. बिहार में किसान तीन फसल उपजाते हैं: खरीफ, रबी और गरमा धान. कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने वैज्ञानिकों से वर्तमान खरीफ सीजन में धान के पैदावार का डेमो देने का अनुरोध किया, जिसके लिए वैज्ञानिक तैयार हो गए. वैज्ञानिकों ने बताया कि उनके द्वारा विकसित धान की किस्म बाढ़ के पानी के फ़ोर्स को 15 दिनों तक झेल सकती है.

वैज्ञानिकों ने ये जानकारी भी दी कि उन्होंने वाराणसी में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय शोध संस्थान स्थापित किया है और देश के कई कृषि विश्विद्यालयों के साथ शोध के लिए अग्रीमेंट कर रहे हैं, जिसमे भागलपुर के सबौर स्थित बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी भी है.


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