दलितों के खिलाफ शराबबंदी से जुड़े केस वापस लें: मांझी

पटना : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्च के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दलितों के खिलाफ शराबबंदी से जुड़े मामलों में दर्ज केस वापस लें. उन्होंने तंज करते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद सबसे ज्यादा संख्या में दलितों को जेल भेजा गया है, तो क्या दलित ही सबसे ज्यादा शराब पीते हैं, और सफेदपोश सब दूध के धुले हैं?

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने शराबबंदी कानून में सुधार की बात करनी शुरू कर दी है, क्योंकि चुनाव नजदीक आ गये हैं. मुख्यमंत्री चुनाव नजदीक आने पर अब दलितों की सहानुभूति अर्जित करने में लग गए हैं. मांझी ने कहा कि शराबबंदी कानून के अंतर्गत जेल भेजे गए लगभग 1.27 लाख लोगों में 78,000 दलित हैं. इस कानून के तहत ऊँची तबके के लोग मुश्किल से गिरफ्तार किये गए हैं, जबकि ये हकीक़त है कि बिहार में घर घर शराब की सप्लाई हो रही है, ब्लैक मार्किट फल फूल रहा है, और सफेदपोश घरों में, शादियों में, पार्टियों में शराब जम कर पी रहे हैं और दलितों को मुख्यमंत्री के अतिउत्साह का चारा बनना पड़ रहा है. उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को दलित विरोधी घोषित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आये दिन दलितो पर होने वाले अत्याचार की घटना को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है.


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