भारत में गंभीर जलसंकट, वाटर मैंनेजमेंट में बिहार-झारखंड सबसे पीछे, गुजरात नंबर वन

नयी दिल्ली : केंद्रीय ‘थिंक टैंक’ नीति आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत अबतक के इतिहास में सबसे गंभीर जलसंकट का सामना कर रहा है. जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जलसंकट के कारण लाखों लोगों की जिंदगी और आजीविका पर संकट बना हुआ है. स्थिति यह है कि हर साल 200,000 लोगों की मौत शुद्ध जल के अभाव में हो जाती है. जल के उचित प्रबंधन और उपयोग के अभाव में जलसंकट अभी और गहरायेगा ऐसी नीति आयोग ने अपने रिपोर्ट में कहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक भारत में जल की डिमांड आपूर्ति से दोगुना होने का अनुमान है, जिसके कारण लाखों लोगों को गंभीर जलसंकट सामना करना पड़ेगा. इन तमाम बातों को समाहित करते हुए ‘समग्र जल प्रबंधन शीर्षक वाला दस्तावेज इंडेक्स ‘, गुरुवार को जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी और नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जारी किया.

समग्र जल प्रबंधन सूचकांक में गुजरात अव्वल राज्य के रूप में उभरा है. उसके बाद क्रमश: मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र का स्थान है. केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग, पोत परिवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा जारी इस रिपोर्ट में पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा 2016-17 में पहले स्थान पर रहा. उसके बाद क्रमश: हिमाचल प्रदेश, सिक्कम और असम का स्थान है. नीति आयोग ने समग्र जल प्रबंधन के पहले सूचकांक के आधार पर राज्यों की सूची तैयार की है. यह सूचकांक नौ व्यापक क्षेत्रों में भूमिगत , जल निकायों के स्तर में सुधार , सिंचाई, कृषि गतिविधियां, पेय जल, नीति एवं संचालन व्यवस्था समेत कुल 28 विभिन्न संकेतकों के आधार पर तैयार किया गया है.

इसमें जल की स्थिति के आधार पर राज्यों को दो विशेष समूह….पूर्वोत्तर तथा हिमालयी राज्य एवं अन्य राज्य…में बांटा गया है. रिपोर्ट के अनुसार जल प्रबंधन के मामले में झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब है. वर्ष 2015-16 के मुकाबले सुधार के मामले में सामान्य राज्यों में राजस्थान पहले स्थान पर रहा जबकि पूवोत्तर और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा पहले स्थान पर है. नीति आयोग ने भविष्य में सालाना आधार पर रैंकिंग जारी करने का प्रस्ताव किया है.

आधिकारिक बयान के अनुसार यह सूचकांक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के जल संसाधन के प्रभावी प्रबंधन के आकलन एवं सुधार का एक महत्वपूर्ण जरिया होगा. इसे जल संसाधन मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय तथा सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी के साथ तैयार किया गया है. यह सूचकांक राज्यों एवं संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों :विभागों को जल संसाधन के बेहतर प्रबंधन के लिए उपयुक्त रणनीति बनाने एवं क्रियान्वयन के लिए उपयोगी सूचना उपलब्ध कराएगा.


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