यूएस ड्रोन हमले में पाकिस्तान तालिबानी नेता फजलुल्लाह की मौत

पाकिस्तानी तालिबानी नेता फजलुल्लाह जिसने मलाल युसुफजई पर गोली चलायी थी, की मौत अमरीकी ड्रोन हमले में हो गयी. एक अमरीकी सैन्य अधिकारी ने वोईस ऑफ़ अमेरिका को सूचना दी.

फजलुल्लाह तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान का चीफ था और “मुल्ला रेडियो” के नाम से भी जाना जाता था. अमरीकी फ़ौज ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर पर कुनार प्रान्त में 13 जून को ऑपरेशन किया, जिसमे फजलुल्लाह की मौत की खबर सामने आई.

हालाँकि ये पहली बार नहीं है. 2010 से अब तक कम से चार बार फजलुल्लाह के मौत की अफवाह उड़ी थी, इसलिए अभी संदेह के बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं.

अमेरिका ने कहा है कि फजलुल्लाह ही वह व्यक्ति है जिसने 2012में मलाल युसुफजई की हत्या का प्रयास किया था. उसने 2012 में बस को रोका, और बस में चढ़कर पूछा: मलाला कौन है? फिर उसने मलाला के सिर में गोली मार दी. सौभाग्य से मलाला बच गयी और आगे चलकर 2014 में उसे नोबेल प्राइज भी मिला.

फजलुल्लाह मुल्ला रेडियो के नाम से भी जाना जाता था, क्योंकि 2006 से ही पाकिस्तान का स्विट्ज़रलैंड कहे जाने वाले स्वात वैली में रेडियो पर कट्टर धार्मिक भाषण दिया करता था. कहा जाता है कि महिलाएं बहुत बड़ी संख्या में उसके भाषणों को सुन कर उसके प्रभाव में आ गयीं और उन्होंने अपने जेवर आभूषण उसे दान में दिए और अपने पतियों को जेहाद में शामिल होने के लिए प्रेरित किया.

फजलुल्लाह 2013 में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान का चीफ बन गया. वो  दिसंबर 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले का मास्टरमाइंड था. जिसमे कुल 151 लोगों की मृत्यु हो गयी, जिसमे 130 से अधिक बच्चे थे.

पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार फजलुल्लाह का जन्म स्वात वैली में फज़ल हयात के नाम से हुआ था. वो शुरू में क्रिकेट का बहुत बड़ा फैन था लेकिन जब से वो कट्टर इस्लामी सूफी मुहम्मद के प्रभाव में आया, उसमे जबरदस्त बदलाव आया. उसने मदरसे में पढ़ाई की थी और जीविका के लिए लकड़ी बेचा करता था. बाद में वह  अपने ससुर की धार्मिक संस्था तहरीक ए नफ्ज़ ए शरीअत ए मुहम्मदी में शामिल हो गया.

उसके परिवार के लोगों ने उसे धार्मिक कट्टरता के मार्ग से हटाने की कोशिश की, पर वो धार्मिक उन्माद में इतना अंधा हो चला था, कि 2007 में उसने अपने दो चाचा की ह्त्या कर दी.

2007-2009 के बीच स्वात घाटी पर उसका नियंत्रण था. इस दौरान उसने घाटी में कट्टर शरियत कानून लागू किया. सूफी संतों, नाचने वाली महिलाओं की ह्त्या करवा कर उनकी लाशों को चौक चौराहों पर डाल देना, लड़कियों का स्कूल जाना बंद करवाना आदि उसके काम थे. जून 2012 के पाकिस्तानी सेना पर हमले का भी वो दोषी था. इस हमले में 17 पाकिस्तानी सैनिकों के सर कलम कर दिए गए थे.

अमेरिकी सेना ने उसके सिर पर 50 लाख यूएस डॉलर का इनाम रखा था. उसका बेटा अब्दुल्लाह भी अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था.


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