राजनंदगाव, जहां पीरियड्‌स आने पर महिलाओं को कर दिया जाता है गांव से बाहर…

राजनंदगांव (छत्तीसगढ़) : हम 21वीं सदी में जीने का दावा तो करते हैं लेकिन आज भी समाज में कई ऐसी परंपराएं कायम हैं, जो इस बात को झुठलाती हैं और यह साबित करती हैं कि हम 18वीं शताब्दी में ही हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़, के राजनंदगांव की, जहां आज भी पीरियड्‌स के दौरान महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है, यहां तक तक कि उन्हें घर में रहने की इजाजत भी नहीं है.
राजनंदगांव के वनांचल, सीतागांव में गांव की महिलाएं पीरियड्‌स के दौरान गांव के बाहर बने झोपड़ी में रहती हैं. गांववालों को डर है कि अगर वे इस दौरान महिलाओं को घर में रहने देंगे तो उन्हें भगवान के क्रोध का सामना करना पड़ेगा.

गौरतलब है कि हमारे देश में आज भी पीरियड्‌स से जुड़े कई मिथक हैं, जिसमें मंदिर ना जाना, रसोईघर में प्रवेश ना करना, पति के साथ शारीरिक संबंध ना बनाना, परिवार से अलग-थलग रहना आदि शामिल है. हालांकि दक्षिण भारत और ओडिशा जैसे राज्यों में जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड्‌स आता है, तो उत्सव सा माहौल होता है, लेकिन उसके साथ ही उस लड़की का लड़कों के साथ खेलना-कूदना भी यह कहकर बंद करा दिया जाता है कि अब वह बड़ी हो गयी है.

वहीं असम में प्रतिवर्ष ‘अंबुबाछी’ त्योहार मनाया जाता है, जो पीरियड्‌स का ही उत्सव है. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान देवी रजस्वला होती है. लेकिन सवाल यह है कि जब देवी को पीरियड्‌स आता है तो उत्सव होता है, तो फिर एक औरत को पीरियड्‌स आने पर उसकी ऐसी उपेक्षा क्यों??


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