बाल विवाह एवं दहेज प्रथा को मिटाने के लिए नीतीश कुमार ने लिखी सरपंचों को चिट्ठी

पटना : बाल विवाह एवं दहेज प्रथा सामाजिक अभिशाप के साथ साथ गैरकानूनी भी है. इन कुप्रथाओं के उन्मूलन हेतु कानूनी अंकुश के साथ- साथ राज्य में इसके विरुद्ध सामाजिक पहल की भी आवश्यकता है. उक्त बातों का उल्लेख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सरपंचों के नाम लिखे पत्र में किया है. उन्होंने बाल विवाह एवं दहेज प्रथा को रोकने के लिए गांव स्तर तक जाकर सहयोग की अपील की है.

पढ़िए उनकी चिट्ठी, जो उन्होंने सरपंचों को लिखा है,

आप अवगत होंगे कि बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा एक सामाजिक अभिशाप के साथ साथ गैर कानूनी भी है. इन कुप्रथाओं के उन्मूलन हेतु क़ानूनी अंकुश के साथ- साथ राज्य में इसके विरुद्ध सामाजिक पहल की भी आवश्यकता है.

राज्य में पूर्ण शराबबंदी एवं नशामुक्ति के अभियान में आपकी सार्थक भागीदारी एवं सहयोग हेतु हम आपके आभारी हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि नशामुक्ति के इस मुहीम में आप अपना सकारात्मक योगदान लगातार देते रहेंगे. सामाजिक अभियान की कड़ी में बाल विवाह और दहेज़ प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक नए अभियान की शुरुआत की जा रही है और मुझे आशा है कि इस मुहीम में आपके नेतृत्व और भागीदारी से हमें सफलता प्राप्त होगी.

‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम’, 2006 के प्रावधानों के अनुसार लड़कों की शादी की उम्र 21 वर्ष और लड़कियों की शादी की उम्र 18 वर्ष निर्धारित है. इससे कम उम्र की शादी को क़ानूनी अपराध माना गया है. कोई भी व्यक्ति, समूह या संगठन बाल विवाह को बढ़ावा देता है, तो वह सजा का हकदार है. इसी तरह “ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम”, 1961 के अनुसार दहेज़ का लेन –देन भी कानूनी अपराध है और कानून में दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है.

“ बाल विवाह और दहेज़ मुक्त बिहार’ के लिए हम सब मिलकर एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण कर सकते हैं. बेटियों को बोझ न समझें, बेटा और बेटी के अंतर को मिटायें, बेटियों को बराबरी का मौका दें, उन्हें पढ़ाएं और अपने पैरों पर खडा होने का अवसर दें. सभी को कम उम्र की शादी से होने वाले दुष्परिणामों को समझना होगा. कम उम्र की शादी से लड़कियों को कई प्रकार की शारीरिक समस्यायों का सामना करना पड़ता है. ऐसे विवाहों के उपरान्त पैदा होने वाले बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास भी प्रभावित होता है. सरकार इन सामाजिक बुराइयों को दूर करने एवं ऐसी कुरीतियों को बढ़ावा देने वाले लोगों को क़ानूनी प्रावधानों के अनुरूप दण्डित करने हेतु प्रतिबद्ध है. मात्र कानूनी प्रावधानों से इन कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त करना संभव नहीं हो पा रहा है, अतः इसके लिए व्यापक जन चेतना की भी आवश्यकता है. इसी क्रम में आपके क्षेत्र में इन बुराईयों को जड़ से मिटाने में आपका सक्रीय सहयोग अपेक्षित है.

इन दोनों बुराईयों के उन्मूलन हेतु आपसे अपील है कि ऐसा प्रयास करें कि सभी लोग प्रण लें कि अपने घर, गाँव, पड़ोस में बाल विवाह और दहेज़ का लेन-देन नहीं करेंगे और दूसरों को भी इस हेतु प्रेरित करेंगे और ऐसे शादी विवाह में शामिल नहीं होंगे, जहाँ दहेज़ का लेन-देन हुआ है या कम उम्र में शादी करायी जा रही हो.

आईये हम सब मिलकर बाल विवाह और दहेज़मुक्त बिहार के निर्माण के इस प्रयास में समर्पित सहयोग करें.

सादर

आपका ही

नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री की चिट्ठी राज्य भर के पंचायतों के सरपंचों को महिला विकास निगम, बिहार भेज रहा है.

 


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