गंगा को बचाइए : नीतीश

पटना : सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर स्थित ज्ञान भवन में आज दो दिवसीय पूर्वी भारत जलवायु कॉन्क्लेव-2018 के उद्घाटन सत्र का मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार एवं केंद्रीय, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ0 हर्षवर्द्धन ने शुभारंभ किया.

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बचपन में हमलोग पढ़ते थे कि मॉनसून 15 जून तक आ जाता है, लेकिन अब उसमें भी देर होती है। बिहार में वर्षापात का औसत 1200 से 1500 एम0एम0 के बीच होता था. हाल ही में बाढ़ एवं सुखाड़ के पूर्व होने वाली तैयारियों की समीक्षा बैठक में मौसम विभाग के प्रतिनिधियों ने इस वर्ष औसत वर्षापात का अनुमान 1027 एम0एम0 बताया है. यह 30 वर्षों (वर्ष 1980 से 2010) के दौरान होने वाले वर्षा के आधार पर निर्धारित किया गया है. जब से हमने बिहार का कार्यभार संभाला है यानि वर्ष 2006 से वर्ष 2017 के बीच 12 वर्षों में औसत वर्षा 912 मि0मी0 हुयी है. इसमें भी मात्र तीन वर्ष 1000 मि0मी0 वर्षा हुयी है जबकि शेष वर्षों में 800 मि0मी0 ही वर्षा हुई है.

जलवायु परिवर्तन की चर्चा में नीतीश ने गंगा का मसला उठाया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गंगा को लेकर गलत आंकड़े दे रही है. गंगा की ना तो निर्मलता बची है ना ही अविरलता. गंगा नदी में काई दिखायी देने लगा है, जैसे जमे हुए पानी में दिखता है. कई जगहों पर गंगा का पानी नाले के पानी जैसा हो गया है. मैंने खुद नितिन गडकरी को गंगा के संबंध में कई सलाह दिये लेकिन उन्हें नहीं माना गया.

नीतीश कुमार ने जलमार्ग परियोजना की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि इस साल जनवरी में बनारस से पटना आ रहा एक जहाज बक्सर के पास गंगा नदी में फंस गया. दो महीने पहले उस जहाज को निकालने के लिए दूसरा जहाज भेजा गया. वो जहाज भी उससे पहले ही नदी में फंस गया. बक्सर में गंगा नदी की गहराई एक मीटर बची है. इसमें जहाज कैसे चलेगा.

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