FGM यानी खतना की शिकार महिलाओं के लिए WHO ने handbook जारी किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO ) ने एक मई 2018 को एक क्लीनिकल हैंडबुक लाॅन्च किया है, जिसके जरिये female genital mutilation यानी खतना का शिकार बनी महिलाओं के लिए उचित स्वास्थ्य देखभाल के बारे में विस्तार से बताया गया है. आंकड़ों के अनुसार विश्व के 30 देशों में लगभग 200 मिलियन लड़कियां FGM यानी खतना की शिकार होती हैं, जिनमें अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और एशिया की महिलाएं शामिल हैं. हालांकि खतना आज वैश्विक समस्या बन चुका है और इसकी शिकार महिलाएं विश्व के हर कोने में मौजूद हैं, ऐसे में यह जरूरी है कि स्वास्थ्य कर्मचारी खतना की शिकार महिलाओं को पहचानें और उन्हें उचित स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करायें.

FGM यानी खतना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लड़कियों और महिलाओं के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में चिह्नित किया गया है, जिसमें स्त्री जननांग के आंशिक या कुल निष्कासन, या गैर-चिकित्सा कारणों से स्त्री जननांग को चोट पहुंचाना शामिल है. खतना का कोई चिकित्सा औचित्य नहीं है बल्कि यह सिर्फ नुकसान पहुंचाता है अत: इसे किसी भी हालत में किया जाना गलत है.

इस हैंडबुक का उद्देश्य खतना की शिकार महिलाओं में मानसिक और सेक्सुअल स्वास्थ्य समस्याओं का निदान करना है. गौरतलब है कि खतना से महिलाओं को कई तरह की मानसिक और यौन स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है. हिंदुस्तान में भी बोहरा मुस्लिम समाज की महिलाओं में FGM यानी खतना की परंपरा है.

WHO के इस नये हैंडबुक की मदद से महिलाओं के यौन स्वास्थ्य के बारे में बात करने में मदद मिलेगी. यह यौन स्वास्थ्य के मुद्दों को हल करने और उनका इलाज करने के तरीके पर व्यावहारिक सुझाव भी प्रदान करेगा.  sexual health इंसान की आवश्यकता है. यह हर किसी के स्वास्थ्य और खुशी के लिए जरूरी है, लेकिन खतना से यौन क्रियाओं में सीधे शामिल होने वाले शारीरिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे महिलाओं का यौन स्वास्थ्य प्रभावित होता है. डब्ल्यूएचओ क्लिनिकल हैंडबुक में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य के सभी पहलुओं को शामिल किया है, जिसमें महिलाओं की Sexuality (कामुकता) के साथ- साथ खतना के दुष्परिणामों के बारे में भी बताया गया है.

FGM पीड़ादायक और कई बीमारियों का कारण
Female genital mutilation एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मादा जननांग के ऊपरी भाग को गैर-चिकित्सा कारणों से काटकर निकाल दिया जाता है.

इस प्रक्रिया का कोई शारीरिक फायदा महिलाओं को नहीं होता है. इस प्रक्रिया में अत्यधिक रक्तस्राव होता है और इसके बाद महिलाओं में पेशाब की समस्या उत्पन्न हो जाती है. साथ ही कई तरह के संक्रमण और प्रसव के दौरान जटिलताएं भी उभर आती हैं, जिसके कारण कई बार नवजात की मौत भी हो जाती है. जब लड़की छोटी होती है तभी उसके साथ इस तरह की क्रिया को अंजाम दिया जाता है.

महिला अधिकारों का हनन है FGM
FGM पूरी तरह से महिला अधिकारों का उल्लघंन है. यह लैंगिक असमानता का परिचायक है. इस प्रक्रिया के द्वारा लड़कियों की सेक्स इच्छा को दबाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इससे महिलाएं नियंत्रित रहती हैं.

WHO का कहना है कि यह गलत परंपरा है और लैंगिक विभेद का सूचक भी, इसलिए WHO डॉक्टरों से यह आग्रह करता है कि वे इस तरह के किसी भी कार्य का हिस्सा ना बनें. यह एक व्यक्ति के जीने के अधिकारों का भी उल्लंघन है क्योंकि कई बार इस प्रक्रिया में महिला की मौत तक हो जाती है.

क्या है FGM की प्रक्रिया
FGM की प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती है. पहले चरण में मादा जननांग के बाहरी भाग (clitoris) को पूरी तरह या आशंक रूप से काटकर हटा दिया जाता है. दूसरे चरण में योनि की आंतरिक परतों को भी काटकर हटाया जाता है. तीसरा चरण इन्फ्यूब्यूलेशन का होता है, जिसमें योनि द्वार को बांधकर छोटा कर दिया जाता है. चौथा चरण में भी वो तमाम क्रियाएं की जातीं हैं, जो जननांग को नुकसान पहुंचाती हैं. इससे प्रक्रिया का दुष्परिणाम सेक्स के दौरान और प्रसव के दौरान भी नजर आता है.

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