पटना साहिब लोक सभा सीट और कायस्थ राजनीति

लोक सभा चुनाव को अब मुश्किल से एक साल रह गया है. सूबे की सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावी मोड में आ गयी हैं. सबसे रोचक चर्चा छिड़ गयी है पटना साहिब सीट को लेकर रेस रोचक दौर में प्रवेश कर गया है. भाजपा में पटना साहिब की सीट को लेकर इस बात की कवायद चल रही है कि कौन यहां से सांसद बने.

पटना जिला के इस संसदीय सीट की खासियत है कि चार लाख से अधिक कायस्थ वोटर यहां हैं. पटना महानगर में कायस्थों की बड़ी आबादी है. पटना साहिब की चार विधानसभा सीट दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार और पटना पूर्वी तथा पाटलिपुत्र लोकसभा सीट की दानापुर और फुलवारीशरीफ विधानसभा क्षेत्र में कायस्थों की बड़ी आबादी है. ऐसे में जो यहाँ से सांसद बनेगा, वही पटना महानगर में कायस्थों का नेता बनेगा.

इस सीट पर कायस्थ पॉलिटिक्स का है दबदबा

पटना साहिब के सांसद सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा केन्द्रीय मंत्रिमंडल में स्थान न मिलने से अपनी पार्टी से नाराज हैं और अपने तीखे बयानों के चलते भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा करते रहते हैं. हालाँकि उन पर संघ का हाथ होने के चलते पार्टी कोई एक्शन लेने से बचती रही है.

चर्चाओं पर यकीन करें तो वे कांग्रेस से उम्मीदवार हो सकते हैं. इधर, एक चर्चा यह भी है कि असहज स्थिति के बाद भी भाजपा ने अब तक शत्रुघ्न सिन्हा पर कोई एक्शन नहीं लिया है. इसमें संभावना यह जतायी जा रही है कि उनकी पत्नी को भाजपा उम्मीदवार बना सकती है.

पटना साहिब से भाजपा उम्मीदवार के रूप में कई नामों की चर्चा हो रही है. हालांकि, जिन नामों की चर्चा है उन पर कोई भी खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है. सभी कायस्थ समाज से आते हैं. बांकीपुर और कुम्हरार के विधायक कायस्थ समाज से ही आते हैं, इन दोनों विधायक नितिन नवीन और अरुण कुमार सिन्हा के भी नाम की चर्चा है.

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, सांसद आरके सिन्हा के नाम की भी चर्चा है. दोनों बड़े नेता होने के साथ-साथ अपने समाज का बड़ा चेहरा भी हैं. सांसद आरके सिन्हा के पुत्र व भाजपा के प्रदेश मंत्री रितुराज सिन्हा के नाम की भी चर्चा राजनीतिक हलकों में है.

इस बार जदयू भी है दावेदार:  

इस बार पटना साहेब सीट पर जदयू भी दावेदारी करने के मूड में है. पटना महानगर में फिलहाल जदयू के पास सबसे बड़े कायस्थ नेता रणबीर नन्दन हैं. रणबीर नंदन की छवि न केवल साफ़ सुथरी है, बल्कि वे बी एन कॉलेज में जियोलॉजी के प्रोफेसर भी हैं और वर्तमान में जदयू के विधान पार्षद हैं और साथ ही पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं. वे पुरे पटना महानगर में राजनीतिक गतिविधियों में बहुत एक्टिव हैं और जनता के बीच सहज रूप से उपलब्ध रहते हैं. रणबीर नंदन के अलावा अजय आलोक और राजीव रंजन प्रसाद भी पटना साहेब सीट को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा रखते हैं, परन्तु राजीव रंजन प्रसाद की दीघा विधान सभा सीट से पिछले आम चुनाव में हार और साथ ही पिछले लोक सभा चुनाव में अजय आलोक के पिता डॉक्टर गोपाल प्रसाद की चुनावी हार इन दोनों जदयू नेताओं की उम्मीदवारी पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा गयी है.

फिलहाल राजनीतिक गलियारे में चल रही हलचल पर नज़र रखना रोचक होगा.

 


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