मगहर में इतिहास पर मोदी की एक बार फिर गलतबयानी

नरेन्द्र मोदी अपने भाषण कला के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं. लेकिन इतिहास से जुड़े तथ्यों की गलतियां करते आ रहे पीएम मोदी मगहर में एक बार फिर चूक कर बैठे.

कबीर के 620वें प्राकट्य दिवस के मौके पर मोदी मगहर पहुंचे थे. यहां उन्होंने सबसे पहले कबीर को नमन किया और उनकी समाधि पर चादर भी चढ़ाई.  फिर उन्होंने  जनसभा को संबोधित किया. पीएम मोदी ने कहा, “समाज को सदियों से दिशा दे रहे मार्गदर्शक, समभाव और समरसता के प्रतिबिम्ब महात्मा कबीर को उनकी ही निर्वाण भूमि से एक बार फिर मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं. ऐसा कहते हैं कि यहीं पर संत कबीर, गुरु नानकदेव और बाबा गोरखनाथ ने एक साथ बैठकर आध्यात्मिक चर्चा की थी.”

बता दें कि मोदी ने जिन तीन महापुरुषों के एक साथ बैठकर चर्चा करने की बात कही, वह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है. क्योंकि बाबा गोरखनाथ का काल दोनों संतों से अलग है. नाथ संप्रदाय की स्थापना करने वाले बाबा गोरखनाथ का जन्म 11वीं शताब्दी में हुआ था. जबकि 120 साल जीवित रहने वाले संत कबीर का जन्म 14वीं शताब्दी (1398 से 1518) के आखिर में हुआ था. गुरु नानक का काल 15वीं शताब्दी से 16वीं शताब्दी (1469-1539) के बीच का है.

गुरु नानक और संत कबीर की मुलाकात की बात तो समझ में आती है, लेकिन इन दोनों महापुरुषों से कई साल पहले हुए गोरखनाथ की आध्यात्मिक चर्चा समझ से परे है.

 


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