अस्पतालों में बीमा कवर के जरिये कैशलेस इलाज की सुविधा पर खतरे के बादल

इंश्योरेंस रेगुलेटरी ऐंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर इस साल जुलाई तक देश का कोई अस्पताल नैशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स (एनएबीएच) से मान्यता नहीं लेता है तो वहां हेल्थ इंश्योरेंस के जरिए कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाएगी. कोई भी बीमा कंपनी ऐसे अस्पतालों में यह सुविधा नहीं देगी. ऐसे में कैशलेस इलाज की सुविधा खतरे में पड़ सकती है. सरकार की 5 लाख का मुफ्त हेल्थ कवर देने की आयुष्मान योजना पर भी संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं.

आईआरडीएआई ने यह नोटिफिकेशन करीब दो साल पहले जारी किया था, लेकिन अब तक देश के करीब 30 हजार छोटे-बड़े अस्पतालों में से सिर्फ 1200 ने एनएबीएच से मान्यता ली है. सूत्रों का कहना है कि अगर इन अस्पतालों ने जुलाई आखिर तक अपना सर्टिफिकेशन नहीं कराया तो यहां इंश्योरेंस के जरिये कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाएगी.

दरअसल, एनएबीएच से मान्यता लेने में अस्पताल कतराते हैं. इसकी वजह यह है कि इसके लिए इस संस्था के मानकों के हिसाब से अस्पताल को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्टर, स्टाफ और तमाम सुविधाओं का इंतजाम करना होता है। इस पर होने वाले खर्च के कारण ज्यादातर मंझोले और छोटे अस्पताल एनएबीएच से सर्टिफिकेशन नहीं कराते हैं.


ऐसे में क्या होगा पीएम की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना का ?
सरकार ने हाल में ही देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर देने की योजना को मंजूरी दी है. इसे इस साल 15 अगस्त को लॉन्च किए जाने की योजना है. सरकार ने इसके तहत कैशलेस इलाज की सुविधा देने का वादा किया है. लेकिन अगर इस योजना के पैनल में शामिल अस्पतालों के पास एनएबीएच की मान्यता नहीं होगी तो वहां बिना पैसा दिए इलाज नहीं हो पाएगा. इससे देश की गरीब आबादी को मुफ्त हेल्थ कवर देने की योजना अपना मकसद खो देगी.

फिलहाल  मिशन आयुष्मान ने आईआरडीएआई को लेटर लिखकर अस्पतालों को एनएबीएच की मान्यता लेने के लिए और समय देने की मांग की है.


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