व्हाइट टॉवेल वर्जिनिटी टेस्ट की आड़ में महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार, जानें क्या है सच…

Thomson Reuters Foundation ने मंगलवार 26 जून को एक रिपोर्ट जारी किया है जिसमें यह कहा गया है कि भारत महिलाओं के लिए सुरक्षित देश नहीं है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में महिलाओं के साथ यौन हिंसा और उनकी खरीद-फरोख्त बहुत तेजी से बढ़ रही है. उन्हें जबरन मजदूर बनाने, बलपूर्वक शादी करने और सेक्स मजदूर बनाने के लिए खरीदा और बेचा जा रहा है. इस रिपोर्ट पर देशभर में हंगामा हुआ और इस रिपोर्ट की सच्चाई पर सवाल उठाये गये , लेकिन कहना ना होगा कि इस रिपोर्ट में बहुत कुछ सच है.

आज भी हमारे देश में महिलाओं के साथ कई जगहों पर ऐसा व्यवहार किया जाता है जो अमानवीय है, लेकिन परंपराओं के नाम पर उन्हें ढोया जा रहा है, जी हां यहां बात हो रही है महाराष्ट्र के कंजरभट समुदाय की, जहां शादी के बाद महिलाओं का वर्जिनिटी टेस्ट होता है.

हालांकि इस वर्ष मार्च महीने में सरकार की ओर से लोकसभा में कहा गया था कि महाराष्ट्र में अब महिलाओं का जबरदस्ती कौमार्य परीक्षण या वर्जिनिटी टेस्ट नहीं होगा. हालांकि सरकार ने इस बात को स्वीकारा कि उनके पास इस संबंध में कोई आंकड़ा नहीं है कि कितनी महिलाओं के साथ इस तरह की अमानवीय हरकत हुई, लेकिन ऐसा करना अपराध है और इसपर कार्रवाई होगी.

दरअसल इस साल की शुरुआत में पुणे में तीन लड़कों की पिटाई कंजरभट समुदाय के एक शादी समारोह में हुई, जब उन्होंने पंचायत के सामने लड़की के कौमार्य परीक्षण का विरोध किया था. ये लड़के “Stop the V ritual” नामक एक व्हाट्‌सएप ग्रुप चला रहे थे और पंचायत के सामने लड़की की वर्जिनिटी टेस्ट का विरोध कर रहे थे. यह तीनों युवा प्रशांत इंद्ररेकर, सौरभ माइकल और प्रशांत टैमचिकर ने जनवरी महीने में इस संबंध में प्राथमिकी भी दर्ज करायी थी. जिसके बाद यह मामला गरमाया और लोकसभा में किरण खेर ने यह मुद्दा उठाया.


क्या है कौमार्य परीक्षण या वर्जिनिटी टेस्ट
कंजरभट समुदाय की परंपरा के अनुसार शादी के बाद पहली रात को दुल्हन का वर्जिनिटी टेस्ट कराया जाता है, जिसमें महिला को एक सफेद चादर सोने के लिए दिया जाता है, जब वह पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती है. ऐसा पंचायत के आदेश से किया जाता है. शारीरिक संबंध बनाने के बाद दूल्हे को पंचायत के सामने तीन बार कंफर्म करना होता है कि पत्नी वर्जिन थी, वह खरा-खरा-खरा कहकर अपनी बात कहता है, अगर दुल्हन इस टेस्ट में पास नहीं होती, तो दुल्हन को आर्थिक दंड लगाया जाता है, साथ ही उसके साथ मारपीट भी की जाती है. कई जगहों पर गांव की बुजुर्ग महिलाएं सफेद चादर का निरीक्षण करती हैं, चादर पर खून लगा होना जरूरी है, अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे पति द्वारा छोड़ दिये जाने की परंपरा भी समाज में व्याप्त है.

हालांकि सरकार ने ऐसा दावा किया है कि अब ऐसी घटनाएं दंडनीय होंगी लेकिन कंजरभट समुदाय में आज भी वर्जिनिटी टेस्ट बदस्तूर जारी है. यही कारण है कि आज इस समुदाय के कुछ युवा सामने आये हैं और इस प्रथा का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह किसी की निजी जिंदगी में दखल है. “Stop the V ritual” अभियान चलाने वाले युवा इस परंपरा के खिलाफ खड़े हैं और जागरूकता अभियान चला रहे हैं, इन्होंने एक फेसबुक पेज भी बनाया है जिसके जरिये इस परंपरा के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. कल 30 जून को भी इसी अभियान के तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है.

महिला विरोधी परंपरा
आज के समय में कंजरभट समुदाय की एक युवतियां इसका विरोध कर रही हैं. इसी समुदाय की एक महिला प्रियंका का कहना है कि यह पूरी तरह से महिला विरोधी परंपरा है. मैं किसी भी कीमत पर पंचायत को अपने साथ यह व्यवहार नहीं करने दूंगी, मैं अपने जीवनसाथी से बात करूंगी और इस घटिया परंपरा का विरोध करूंगी. कुछ लोग यह कहते हैं कि वर्जिनिटी टेस्ट से वही महिलाएं डरती हैं, जिन्होंने दूसरे पुरुषों से संबंध बनाये हों, लेकिन मेरा ऐसे लोगों से यह सवाल है कि क्या पुरुषों के लिए कोई ऐसी टेस्ट उन्होंने बनायी है? अगर नहीं तो फिर महिलाओं के लिए क्यों?

पिछले साल दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा मानसी चड्ढा ने अपनी आपबीती शेयर की थी कि किस तरह उसकी सास ने उसे व्हाइट टॉवेल टेस्ट के लिए बाध्य किया और उसके पति ने इसका विरोध भी नहीं किया, जबकि वे लोग एक पढ़े-लिखे परिवार से हैं. मानसी की स्टोरी सोशल मीडिया की सुर्खियां बनी थी.


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