सरकार IDBI बैंक के बैड लोन से निपटने के लिए IDBIको एलआईसी के हाथों में सौंपने की तैयारी में

केंद्र सरकार ने कर्ज से बोझ तले दबे आईडीबीआई बैंक को उबारने के लिए एलआईसी की मदद लेने की योजना तैयार कर ली है और इसे लेकर बातचीत शुरू हो गई है. सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहता है. आईडीबीआई बैंक में सरकार की 85 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में बैंक को घाटे से उबारने के लिए सरकार अपनी हिस्सेदारी एलआईसी के हाथों बेच सकती हैं, हालांकि सरकार अपनी कितने हिस्सेदारी बेचेगी इसे लेकर फैसला नहीं हो सका है, लेकिन अगर एलआईसी और आईडीबीआई के बीच साझेदारी होती है तो LIC पॉलिसी होल्डर पर बड़ा असर पड़ना तय माना जा रहा है.

एक आंकड़े के मुताबिक हर साल एलआईसी करीब 20 लाख पॉलिसी जारी करती है. एलआईसी से 25 करोड़  लोगों  ने एलआईसी से करीब 30 करोड़ लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली है. एलआईसी के पास सालाना करीब 3 लाख करोड़ का प्रीमियम जमा होता है.

अगर एलआईसी और आईडीबीआई बैंक के बीच साझेदारी हो जाती है तो जो पैसा ग्राहक अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए एलआईसी की पॉलिसी में निवेश करते हैं, अब उसका इस्तेमाल बैंक को डूबने से बचाने के लिए किया जाएगा.

ऐसे में एलआईसी पॉलिसी होल्डर्स के मन में ये सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या सरकार के इस फैसले से उनके द्वारा भविष्य के लिए जमा की गई पूंजी सुरक्षित रहेगी.

LIC काफी लंबे वक्त से बैंकिंग सेक्टर में उतरने का मन बना रही है। केंद्र सरकार ने एलआईसी को शेयर बाजार में निवेश की भी अनुमति दी, लेकिन इससे पॉलिसी होल्डर्स की जमा पूंजी पर खतरा बढ़ गया. ऐसे में कंपनी ने बैंकिंग सेक्टर में निवेश के लिए कई सरकारी बैंकों में कुछ हिस्सेदारी खरीदी. अब सरकार एलआईसी की इसी चाहत का फायदा उठाना चाहती है.

बतौर बीमा कंपनी एलआईसी लोन मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी रखती है. साल 2017 में एलआईसी से 1 ट्रिलियन रुपए से अधिक का कर्ज बांटा था। लेकिन अगर एलआईसी खुद बैंकिंग सेक्टर में उतरती हैं तो उसके सामने भी एनपीए से निपटने की चुनौती होगी.


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