शराबबंदी से बिहार बदला है. अध्ययन के लिए दुसरे राज्यों से अध्ययन दल आ रहे

चिंता, सुनीता, सुमनी देवी जैसी हजारों महिलाओं की एक आपबीती – पति, पिता की शराबखोरी की आदत से जिंदगी जहमत बन गई थी, शराबबंदी से मिला सहारा. आज ये इन सरीखी महिलायें शराबबंदी की सबसे बड़ी समर्थक हैं.

बिहार में अब अगर इस तरह पीते पाए जायेंगे, तो जेल होगी.

चिंता एक गरीब परिवार की लड़की थी. उसके शराबी पिता ने उसकी शादी कम उम्र में कर दी. चिंता का पति भी उसके पिता की तरह शराबी निकला. काम काज में मन न लगाता, नशे में कहीं लुढ़का पड़ा रहता. रोज चिंता उसे खोजने निकलती. धूल-माटी से सने पति को किसी तरह घर लाती. यही उसकी दिनचर्या थी. चिंता ने जो बचपन में खुद झेला था, अब उसके बच्चे झेल रहे थे. सारण जिले के मकेर की चिंता की जिंदगी जहमत बन गई थी. फिर सब कुछ बदला. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी से पति की पीने की लत ही नहीं छूटी चिंता को जीने की हिम्मत भी मिली. चिंता आज सरकार के शराबबंदी मुहिम की प्रमुख पैरोकार है. इसी जिले के सोभेपुर गांव की सुनीता को जब नशे में धुत पति ने पीटा तो गांव की महिलाओं को सब्र टूट गया, उन्होंने सुनीता के पति को न सिर्फ पुलिस के हवाले किया, बल्कि सोभेपुर की महिलाएं आज इलाके की पहरेदार बन गयी हैं, लिहाजा कोई चोरी-छुपे भी शराब पीने की हिम्मत नहीं जुटा पाता.

गया जिले के खिजरसराय प्रखंड के चिरैली गांव की सुमनी देवी के लिए पति की शराब पीने की आदत के चलते घर चलाना मुश्किल था. पाई-पाई जोड़कर कुछ पैसे जमा करती, पति उसे भी छीन लेता. प्रतिरोध करती तो पीटता. गांव की महिलाओं को पता चला तो सब झुंड में सुमनी के घर पहुंच गईं. पति को समझाया, धमकाया कि जेल भिजवा देंगे. पति नहीं माना. महिलाओं के जाते ही सुमनी पर टूट पड़ा।. सुबह होते ही खबर गांव में फ़ैल गयी. महिलाएं FIR करने को तैयार हो गयीं. यह देख सुमनी का पति सहम गया. उसने सबके सामने शराब न पीने की कसम खायी.

 

राज्य में व्यापक पैमाने पर धड़ पकड़ हो रही है

राज्य में शराबबंदी के बाद एक बड़ा तबका ऐसा भी रहा जिसकी लत छूटी नहीं। ऐसे ही लोगों की चाहत ने सूबे में शराब के अवैध कारोबारियों को हिम्मत दी. तथ्यों को देखें तो 15 से अधिक राज्यों के शराब तस्करों ने बिहार को निशाना बनाया, 584 तस्करों की गिरफ्तारियों से इसकी पुष्टि भी होती है. सूत्रों के मुताबिक शराबियों और शराब के अवैध करोबारियों की अधिकांश गिरफ्तारियां शराबबंदी के पक्षधर लोगों की सूचनाओं पर हुई हैं.

इनमें जीविका की दीदियों की भूमिका अहम है.

 

शराबबंदी के बाद
बिहार की शराबबंदी ने पूरे देश को झकझोरा है। कई राज्यों में शराबबंदी की मांग गूंजी. कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गए.  अब तो दूसरे राज्यों की टीमें बिहार यह सीखने आ रहीं हैं कि यहां शराबबंदी सफल कैसे हुई.

 

बिहार में शराबबंदी से नुकसान नहीं, उलटे फायदा; 3 हजार करोड़ रु. बढ़ा राजस्व

बिहार में शराबबंदी की नीति, उसके क्रियान्वयन और प्रभाव का अध्ययन करने के लिए छत्तीसगढ़ का 11 सदस्यीय अध्ययन दल अभी राज्य के दौरे पर है. शुक्रवार को इनकी मुलाकात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ प्रस्तावित थी. लेकिन, सीएम की अस्वस्थता के कारण अध्ययन दल उनके परामर्शी अंजनी कुमार से मिला. दल के सदस्यों ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी शराबबंदी के पक्ष में हैं और इसके लिए वातावरण बनाने में लगे हैं. इसी कड़ी में हमलोगों को बिहार के शराबबंदी कानून का अध्ययन करने के लिए भेजा गया है. अंजनी कुमार सिंह ने उन्हें बताया कि बिहार में शराबबंदी लागू करना बहुत कठिन काम था। लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण शराबबंदी लागू कर दी गई. इससे पहले दल को मद्य निषेध, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शराबबंदी कानून की बारीकियों और लागू करने के तरीकों की जानकारी दी. बताया कि शराबबंदी से राजस्व का नुकसान नहीं हुआ, बल्कि 3 हजार करोड़ की बढ़ोतरी हुई.

 


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