ऑस्ट्रेलिया ने चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत को 3-1 से हराया

चैम्पियंस ट्रॉफी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को आखिरी बार 2002 में हराया था.

भारत ने 2011, 2010, 2009, 2008, 2007 और 2006 में चैम्पियंस ट्रॉफी में भाग नहीं लिया था

भारत 40 साल में एक बार भी चैम्पियंस ट्रॉफी नहीं जीत सका

भारतीय कप्तान पीआर श्रीजेश टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुने गए

ब्रेडा (नीदरलैंड).ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को यहां भारत को हराकर चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया. उसने लगातार दूसरी और कुल 15वीं बार यह खिताब जीता है. फाइनल मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूट आउट में हुआ. फुल टाइम तक दोनों टीमों का स्कोर 1-1 से बराबर था. लेकिन पेनल्टी शूट आउट में ऑस्ट्रेलिया ने 3-1 से यह मुकाबला जीत लिया. भारतीय टीम लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंची थी, लेकिन इस बार भी उसे निराशा ही हाथ लगी. टूर्नामेंट का यह 37वां संस्करण है, लेकिन भारत एक बार भी चैम्पियन नहीं बन सका है. आज के मैच के बाद भारत चैम्पियंस ट्रॉफी में दो बार उपविजेता, एक बार तीसरे (1982) और 7 बार (1983,1996, 2002, 2003, 2004, 2012, 2014) चौथे स्थान पर रहा है. चैम्पियंस ट्रॉफी की शुरुआत 1978 में हुई थी.

पेनल्टी शूट आउट में इस तरह जीती ऑस्ट्रेलियाई टीम

पेनल्टी शूट आउट में दोनों टीमों के लिए 5-5 मौके तय किए थे. पहला मौका ऑस्ट्रेलिया को मिला.
पहला मौकाःऑस्ट्रेलिया के एरन जालेवस्की ने भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश को चकमा देते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया.
दूसरा मौकाःसरदार सिंह ऑस्ट्रेलिया के गोलकीपर टेलर लवल के किले को भेद नहीं सके और भारत 0-1 से पीछे हो गया.
तीसरा मौकाः ऑस्ट्रेलिया के डेनियल बीएले ने अपनी टीम के लिए एक और गोल किया. ऑस्ट्रेलिया 2-0 से आगे हो गया.
चौथा मौकाः हरमनप्रीत सिंह ने गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाने की काफी कोशिश की, लेकिन टेलर लवल फिर दीवार बन गए. भारत 0-2 से पीछे रहा.
पांचवां मौकाःपीआर श्रीजेश ने ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू स्वान की कोशिश को नाकाम कर दिया, लेकिन उनकी टीम अब भी मुकाबले में 0-2 से पीछे थी.
छठा मौकाःमनप्रीत सिंह ने टेलर लवल को छकाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया. हालांकि अब भी वह 1-2 से पीछा था, लेकिन उसके पास बराबरी का मौका था.
सातवां मौकाःश्रीजेश ऑस्ट्रेलिया के जेरेमी एडवर्ड्स के प्रयास को नाकाम नहीं कर पाए. नतीजा ऑस्ट्रेलिया 3-1 से आगे होने के साथ ही टूर्नामेंट का चैम्पियन भी बन गया.

विवेक ने दिलाई थी मैच में बराबरी

फुल टाइम में विवेक सागर प्रसाद के गोल से भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बराबरी हासिल की थी. 43वें मिनट में चिंगलेनसाना ने विवेक को पास दिया. उन्होंने इसे गोल में बदलने में कोई गलती नहीं की. ऑस्ट्रेलिया की ओर से ब्लेक गोवर्स ने 24वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला था. इससे पहले भारत को 4 पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह एक भी गोल में बदलने में नाकाम रहा था.

4 पेनल्टी कॉर्नर में एक को भी गोल में नहीं बदल पाया था भारत

भारत ने 7वें मिनट में पहला पेनल्टी कॉर्नर रिव्यू के जरिए लिया. लेकिन वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बढ़त लेने में असफल रहा. अगले ही मिनट (8वें) उसे फिर पेनल्टी कॉर्नर मिला. हालांकि मनदीप सिंह और वरुण कुमार इसे भी गोल में बदलने में सफल नहीं हुए. इसके बाद भारत को 13वें मिनट में भी गोल करने का मौका मिला, जब सुनील सोमरपेट गेंद को लेकर बिल्कुल ऑस्ट्रेलिया के गोलपोस्ट तक पहुंच गए थे, लेकिन टेलर लवल उनकी कोशिश नाकाम कर दी. 18वें मिनट में भी भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन हरमनप्रीत सिंह ने शॉट लिया, लेकिन इस बार जेरेमी हेवर्ड ने उनके प्रयास पर पानी फेर दिया. हाफटाइम के बाद 38वें मिनट में भारत ने फिर वीडियो रिव्यू लिया. भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन इस बार भी नतीजा सिफर रहा. हाफटाइम तक भारत ने गोल के 3 और ऑस्ट्रेलिया ने 4 शॉट लिए. एक दूसरे के सर्किल में पहुंचने के मामले में भी ऑस्ट्रेलियाई टीम आगे रही. भारत विपक्षी टीम के सर्किल में 10, जबकि ऑस्ट्रेलिया 11 बार पहुंचने में सफल रहा.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.