बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से किशोरियां स्वस्थ व आत्मनिर्भर बनेंगी

पटना: कुपोषण से लड़ाई के बीच सरकार ने 11 से 14 साल की ऐसी लड़कियों का भी ख्याल रखा है, जो स्कूल नहीं जा पा रही हैं. ऐसी लड़कियों को चिन्हित कर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कवायद शुरू हो गयी है. इतना ही नहीं, ऐसी लड़कियों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से जरूरी मदद भी उपलब्ध करायी जा रही है.

आंगनबाड़ी केंद्रों से ऐसी लड़कियों को ‘टेक होम राशन’ भी दिया जा रहा है. खास बात यह है कि इन लड़कियों का भविष्य सुरक्षित रहे, इसलिए इन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की भी कोशिश हो रही है.

समाज कल्याण विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में तमाम ऐसी लड़कियां हैं, जो स्कूल नहीं जा पाती हैं. ऐसी लड़कियों को लेकर सरकार के स्तर पर मंथन हुआ. तय किया गया कि स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों व उनके परिवार वालों को पहले जागरूक किया जायेगा.

ताकि वह स्कूल जाएं. फिर भी किसी वजह से वह स्कूल तक नहीं जा पा रही हैं, तो ऐसी लड़कियों को कुछ ऐसा प्रशिक्षण दिया जाये कि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. इसी को ध्यान में रखते हुए काम शुरू हुआ है. चूंकि ये लड़कियां गरीब परिवार से होती हैं, इसलिए इनके सामने दो वक्त की रोटी की भी दिक्कत होती है. इसका भी समाधान सरकार ने खोजा है. इन लड़कियों को आंगनबाड़ी केंद्रों से बंटने वाले राशन को मुहैया कराया जा रहा है. ‘टेक होम राशन’ हर माह उपलब्ध कराया जा रहा है.

बता दें कि पहले से ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह साल के बच्चों को हॉट कुक मील दिया जाता है. छह माह से तीन साल तक के बच्चों के लिए टीएचआर मिलता है. इसमें चावल, मसूर दाल, सोयाबीन की बरी और अंडा शामिल है. गर्भवती महिलाओं को चावल, दाल और अंडा दिया जाता है. इसी तरह धात्री महिलाओं को भी चावल-दाल और अंडा मिलता है. इसी में अब स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों को भी शामिल कर लिया गया है.

 


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