कल खूंटी में नहीं हुआ पत्थलगड़ी, मास्टर माइंड युसूफ पूर्ति के घर कुर्की

खूंटी : जिले में एक एनजीओ के लिए काम करने वाली पांच लड़कियों के साथ पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा किये गये गैंगरेप के बाद पत्थलगड़ी के मास्टर माइंड कहे जानेवाले युसूफ पूर्ति की खोज में पुलिस जोर-शोर से लगी हुई है, इसी क्रम में कल रविवार को पुलिस ने उसके घर की कुर्की की.

कुर्की के पुलिस ने उसके घर से कई दस्तावेज बरामद किये जिससे यह पता चला है कि युसूफ पूर्ति ने ग्रामीणों से लाखों रुपये जमा कराये हैं.
बरामद दस्तावेज के मुताबिक, मुरहू के बाड़ी गांव निवासी कमल मुंडा ने गत नौ जून को दो लाख रुपये उक्त बैंक में जमा कराये हैं. बतौर शाखा प्रबंधक यूसुफ पूर्ति ने उक्त राशि प्राप्ति की जमा पर्ची भी काटी है. इसके अलावा करीब 500 लोगों से पासबुक खोलने के नाम एक-एक सौ रुपये जमा कराये गये हैं. कई लोगों ने 500 रुपये भी जमा किये हैं.

जमा राशि पर यूसुफ पूर्ति ने प्रतिमाह 1.37 प्रतिशत ब्याज देने का जिक्र प्राप्ति रसीद में किया है. पुलिस ने कुर्की जब्ती के दौरान यूसुफ के घर से नकद 10 हजार रुपये भी बरामद किये हैं. पुलिस को अनुसंधान के क्रम में इस बात का पता चला है कि बैंक ऑफ ग्राम सभा के नाम उसने ग्रामीणों से काफी रकम लिये हैं.

वहीं खूंटी और मुरहू प्रखंड के तीन गांवों सपारूम, सेनेगुटू और हितूटोला में प्रस्तावित पत्थलगड़ी का कार्यक्रम ग्रामीणों ने रविवार को स्थगित कर दिया.  ग्रामीणों ने 30 जून को ही जिला प्रशासन को मौखिक तौर पर सूचना दे दी थी कि वे लोग पत्थलगड़ी नहीं करेंगे. उन्होंने कहा था कि वह किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते.

इस कारण रविवार को इन गांवों में न कोई पत्थलगड़ी समर्थक दिखा और न ही स्वयंभू नेता. वहीं गांव में रैपिड एक्शन फोर्स और झारखंड पुलिस के जवान मुस्तैद थे.

इधर ईसाई महासंघ ने पत्थलगड़ी में मिशनरियों की संलिप्तता दिखाने की कोशिश पर आपत्ति जतायी है साथ ही राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने कहा है कि ईसाई आदिवासियों के जाति प्रमाण पत्र के मामले में मुख्यमंत्री का बयान असंवैधानिक ही नहीं, गैरजिम्मेदाराना है. समस्त आदिवासी समाज की पहचान को नकारने की कोशिश है.

इस मसले पर महाधिवक्ता ने भी राज्य सरकार को सलाह देकर आदिवासियत की एक नयी व्याख्या करने की कोशिश की है, जिसका अधिकार उन्हें नहीं है. प्रभाकर तिर्की रविवार को एक्सआइएसएस सभागार में ईसाई आदिवासियों को आरक्षण विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा  इस मामले में संवैधानिक स्पष्टता के बाद भी यदि राज्य सरकार किसी समुदाय और धर्म विशेष को उसके मौलिक अधिकारों से वंचित करने की कोशिश करेगी, तो फिर आदिवासियों के प्रति सरकार की मंशा किसी खास रणनीति की ओर इशारा करती है. कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय ईसाई महासंघ की ओर से किया गया था. कार्यक्रम में अधिक भीड़ होने के कारण परिचर्चा संत जोसफ क्लब के सभागार में भी आयोजित की गयी. परिचर्चा में निर्णय लिया गया कि 15 जुलाई को राजधानी में मौन प्रदर्शन किया जायेगा.


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