#DelhiPowerTussle पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, काम में बाधा ना डालें LG, चुनी हुई सरकार की सलाह मानें

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच जारी सत्ता संघर्ष पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मुद्दे पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि दिल्ली में अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है, केंद्र और राज्य के संबंध अच्छे होने चाहिए और दोनों साथ मिलकर काम करें. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि संविधान का पालन करना हर किसी की जिम्मेदारी है.

कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्‌वीट किया- यह दिल्ली के जनता की जीत है, लोकतंत्र की जीत है. वहीं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहते हैं क्योंकि अब हम दिल्ली की जनता के लिए काम कर सकेंगे. अन्यथा हर फाइल एलजी के पास भेजना पड़ता था, जिससे कई काम फंसे रह जाते थे. वे बेवजह के सवाल करके कामकाज को प्रभावित करते थे.

गौरतलब है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने हाईकोर्ट के 4 अगस्त, 2016 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उपराज्यपाल को प्रशासनिक प्रमुख बताते हुए कहा गया था कि वे मंत्रिमंडल की सलाह और मदद के लिए बाध्य नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपीलीय याचिका में दिल्ली की चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल के अधिकार स्पष्ट करने का आग्रह किया गया था.

अपना फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि एलजी दिल्ली के प्रशासक जरूर हैं लेकिन वे सरकार के कामकाज में बाधा नहीं डाल सकते. उन्हें कैबिनेट की सलाह पर ही काम करना होगा, यह जनता द्वारा चुनी गयी सरकार है. कोर्ट ने कहा कि हर मसले पर एलजी की सलाह ली जाये, यह भी जरूरी नहीं है.कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मसले पर विवाद होता है तो वह मसला राष्ट्रपति के पास जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त नहीं है.


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