जीएसटी के चलते पिछले साल की तुलना में दो गुना से ज्यादा मिला टैक्स

जीएसटी में रिटर्न दायर नहीं करने वाले 18,913 लोगों को नोटिस जारी.

सिर्फ उत्तर बिहार में टैक्स देने वालों की संख्या 11 हजार से बढ़ कर 55 हजार पहुंच गयी.

पटना : जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) कानून को लागू हुए एक वर्ष पूरा होने पर केंद्रीय जीएसटी विभाग की तरफ से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस मौके पर केंद्रीय जीएसटी के प्रधान मुख्य आयुक्त शिव नारायण सिंह ने कहा कि जीएसटी के आने से पारदर्शिता बढ़ी है. पिछले साल की तुलना में टैक्स कलेक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है. वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान 29 फीसदी और 2018-19 में तीन महीने में ही इसमें 70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है.

इसके साल अंत तक काफी बढ़ने की संभावना है. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य में नये कर दाताओं की संख्या 83 हजार से बढ़ कर एक लाख 66 हजार हो गयी है. राजस्व संग्रह भी 83 हजार करोड़ से बढ़कर एक लाख 66 हजार करोड़ पहुंच गया है.

इससे सभी चीजें प्रत्यक्ष हो गयी हैं. राज्य और केंद्र के कर्मियों को ओपन माइंड या खुले मन से सोचने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जीएसटी टैक्स का सफर नमक से शुरू हुआ था और यहां तक पहुंचा. अंग्रेजी शासनकाल में नमक पर उत्पाद कर लगता था. इस वर्ष 63 प्रतिशत कर दाताओं ने ही जीएसटी फाइल किया है. इस मामले में 18 हजार 913 लोगों को नोटिस भी जारी किया जा चुका है.

प्रधान आयकर आयुक्त (बिहार-झारखंड) केसी घुमारिया ने कहा कि जीएसटी मजबूत होगा, तो इसका फायदा आयकर विभाग को भी होगा. आयकर दायर करने वालों की संख्या बढ़ेगी. बिहार में इस बार पांच लाख दो हजार नये आयकर दाताओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन नये कर दाताओं की  संख्या लक्ष्य से ज्यादा पांच लाख 20 हजार तक हो गयी. उन्होंने कहा कि टैक्स अधिकारी अपने को सेवक समझे. जहां कमी है, उसकी पहचान करके उसे दूर करें.

लोगों की मदद करने के बारे में सोचे, सब समस्याएं अपने आप ठीक हो जायेंगी. उत्पाद विभाग के आयुक्त विनायक चंद्र गुप्ता ने कहा कि जीएसटी में अभी भी 30-40 फीसदी लोगों को रिटर्न दायर करने में समस्या आ रही है. यह समस्या मुख्य रूप से छोटे कारोबारियों के साथ ज्यादा आ रही है. इसे दूर करने के लिए हर तरह से प्रयास किया जा रहा है और पूरी प्रणाली ज्यादा पारदर्शी बनायी जा रही है.

जीएसटी आयुक्त-1 रणजीत कुमार ने कहा कि जीएसटी कई देशों में लागू किया गया, लेकिन भारत में ही यह पहली बार में पूरी तरह से सफल हुआ. इस सफल करना बड़ी चुनौती थी. इसके लिए पहली बार राज्य और केंद्र दोनों स्तर के कर्मियों ने मिलकर काम किया. यह संशय के ऊपर आशा की बड़ी जीत है. प्रशासन को टैक्स देने वाले के दरवाजे पर लाकर खड़ा करने से ही यह जीत संभव हो पायी है. आयुक्त-2 नितिन आनंद ने कहा कि जीएसटी के कारण बिहार में दो आयुक्त कार्यालय बनाये गये. राज्य में उत्तर बिहार को ज्यादा फोकस किया जा रहा है. वहां से व्यापार ज्यादा होता है.

सिर्फ उत्तर बिहार में टैक्स देने वालों की संख्या 11 हजार से बढ़ कर 55 हजार पहुंच गयी. कर प्रणाली अगर बेहतर हो, तो लोग टैक्स देना चाहते हैं. इसे बेहतर बनाने की जरूरत है. राज्य वाणिज्य कर विभाग की सचिव प्रतिमा एस वर्मा ने कहा कि जीएसटी की सफलता खुशी और गर्व का विषय है.

 


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