Bad Loan से निपटने के लिए मेहता समिति ने सौंपी सरकार को रिपोर्ट

देश के सरकारी और निजी बैंकों में बढ़ती एनपीए की समस्या से निपटने के लिए अब बैड बैंक के गठन का रास्ता साफ हो गया है. सुनील मेहता समिति ने बैड बैंक के लिए सरकार की योजना का समर्थन किया है जिसमें, डूबे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए संपत्ति प्रबंधन कंपनी-संपत्ति पुनर्गठन कंपनी के गठन का प्रस्ताव किया है.

वित्त मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में समिति ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित बैड बैंक में बाहर के विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए, जिससे दबाव वाली संपत्तियों की समस्या से निपटा जा सके. सिस्टम में दबाव वाली संपत्तियां 11.6 फीसदी पर पहुंच गयी हैं, जो मार्च, 2019 तक 12.2 फीसदी पहुंच सकती हैं. समिति ने सुझाव दिया है कि बजाय प्रतिभूति प्राप्तियां जारी करने के नकद मार्ग पर अधिक निर्भर रहा जाना चाहिए.

समिति के सदस्यों में एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार और बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रमुख बीएस जयकुमार भी शामिल हैं. समिति का सुझाव है कि बैड बैंक का वित्तपोषण बैंकों और विदेशी निवेशकों द्वारा किया जाना चाहिए. इसके लिए सार्वजनिक धन या विदेशी मुद्रा भंडार के एक हिस्से का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आठ जून को पंजाब नेशनल बैंक के गैर कार्यकारी चेयरमैन सुनील मेहता की अगुवाई में समिति की घोषणा की थी. समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए एक पखवाड़े का समय दिया गया था. समिति को डूबे कर्ज की समस्या से निपटान को एआरसी-एएमसी के गठन पर व्यवहार्यता पर रिपोर्ट देनी थी.


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