पटना यूनिवर्सिटी में फॉरेन लैंग्वेज की पढ़ाई को supervision करने के लिए गठित कमिटी में सागरिका चौधरी नॉमिनेटेड

 

पटना: राज्य के प्रतिष्ठित विश्विद्यालय पटना यूनिवर्सिटी में कई नए विदेशी भाषाओँ के लिए कोर्स शुरू किया गया है. ये कोर्स बंगाली भाषा के डिपार्टमेंट द्वारा चलाये जायेंगे. ये कोर्स सेल्फ फाइनेंसिंग मोड में चलेंगे. डिपार्टमेंट दो तरह के कोर्स चलाएगा. एक, छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स और दूसरा, एक साल का डिप्लोमा कोर्स जिसमे फ्रेंच, जर्मन, जापानीज, चीनी भाषाओँ का अध्ययन शुरू होगा.

ये कोर्स सुचारू रूप से चले, विद्यार्थियों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े, जो भी समस्याएं सामने आये, उन्हें तुरंत हैंडल किया जाए, इन मकसद के तहत पटना यूनिवर्सिटी के उप कुलपति प्रोफ़ेसर रास बिहारी सिंह ने फॉरेन लैंग्वेज कमिटी का गठन किया है, जिसमे जदयू नेत्री डॉक्टर सागरिका चौधरी को नामांकित किया गया है.

इस विषय में बात करते हुए डॉक्टर सागरिका चौधरी ने बताया कि वे 2016 में बिहार सरकार के डेलीगेशन के सदस्य के  तौर पर चीन गयी थी. वहां उन्होंने कई यूनिवर्सिटीज का दौरा किया और उनके शीर्ष नेतृत्व से मिलीं, वे बिहार में फॉरेन लैंग्वेज के कोर्स के लिए उत्साहित थे. ऐसे में फिर बात आगे बढ़ी. कुलपति महोदय ने भी इस इनिशिएटिव का पूरा समर्थन किया, इसका नतीजा आज पटना यूनिवर्सिटी में फॉरेन लैंग्वेज डिपार्टमेंट में नए नए कोर्सेज की शुरुआत है.

फॉरेन लैंग्वेज सीखने के फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया वैश्विक  हो गई है. ऐसे में विदेशी भाषाएँ सीखने के कई फायदे हैं. एक तो बिहार में बुद्धिस्ट सर्किट में चीन, जापान, आदि देशों से हजारों की संख्या में विदेशी टूरिस्ट आते हैं, उन्हें यहाँ भाषा की बहुत समस्या आती है. तो ऐसे में टूरिस्ट की जरुरत पूरा करने से रोजगार की असीमित सम्भावना है. इसके अलावा, विदेशी भाषाओँ के जानकार की जरुरत कॉर्पोरेट सेक्टर में, सरकारी विभागों में, कॉलेज और स्कूलों में फैकल्टी के रूप में, ट्रांसलेटर के रूप में, और साथ ही रॉ और आईबी जैसी संस्थाओं में नौकरी के रूप में है. इस भाषा को सीखने के बाद विदेश जाने के भी रास्ते खुल जाते हैं. तो फॉरेन लैंग्वेज का कोर्स न केवल एक वोकेशनल कोर्स है, जिसमे रोजगार के कई रास्ते हैं, बल्कि ये आने वाले वक़्त की जरुरत है.

ऐसे में विद्यार्थियों को फॉरेन लैंग्वेज सीखने के लिए जुट जाना चाहिए.

 


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