70 लोगों से भरी ओवरलोडेड नाव बीच गंगा नदी में डूबने से बची

पटना जिले में गुरुवार को एक बड़ा हादसा टला. 70 लोगों से भरी ओवरलोडेड नाव बीच गंगा नदी में डूबने से बच गयी. राघोपुर दियारे से जेठुली पटना की ओर आ रही नाव का इंजन बीच नदी में चार बजे शाम में डीजल खत्म होने के कारण बंद हो गया.

इसके कारण नाव गंगा नदी में लहरों के कारण फतुहा की ओर बहने लगी और उसमें धीरे-धीरे पानी भी भरने लगा. नाव में सवार लोगों की हालत काफी खराब हो गयी. नाविक ने मदद के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया. नाविक के चिल्लाने पर करीब एक किलोमीटर दूर पर खड़े दूसरे नाविक ने आवाज सुन ली और राघोपुर के घाट से दो नावें बीच गंगा में पहुंचीं.

इसके बाद दोनों नाव से पहले नाव को आगे से बांधा गया और खींच कर जेठुली घाट किनारे लगाया गया. करीब 45 मिनट तक लोगों को बीच गंगा में रहना पड़ा और उनकी हालत ऐसी हो गयी थी कि किसी के मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी.

सबलपुर दियारा में हुई नाव दुर्घटना के बाद बने थे कई नियम :

सबलपुर दियारे में 14 जनवरी, 2017 को नाव दुर्घटना में 25 लोगों की मौत हो गयी थी. यह ओवरलोडेड नाव सबलपुर दियारा से गांधी घाट की ओर आ रही थी. नाव कुछ दूरी पर गंगा नदी में आगे बढ़ी थी और भार अधिक होने के कारण डूब गयी.

इसके बाद प्रशासन द्वारा सबसे पहले यह निर्देश दिया गया था कि गंगा नदी में अब ओवरलोडेड नावें नहीं चलेंगी. इसके बाद कुछ दिनों के लिए तमाम घाटों पर पुलिस फोर्स की तैनाती की गयी थी. लेकिन फिर वहां से पुलिस फोर्स हटा लिया गया. अब ओवरलोडेड नावों पर न तो जिला प्रशासन का ध्यान है और न ही पुलिस प्रशासन का.

ओवरलोडेड थी नाव, नाविक ने नहीं भरवाया था डीजल

राघोपुर से जो नाव जेठुली पटना के लिए चली थी, उसमें क्षमता से अधिक लोग सवार थे. नाव की क्षमता 40 के करीब थी. लेकिन उस पर 70 से अधिक लोग सवार थे. करीब 20 बाइकें, सिलिंडर व अनाज लदे हुए थे. नाव राघोपुर से निकली और घाट से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर आ कर बीच गंगा में अचानक ही बंद हो गयी. नाविक ने बताया कि डीजल खत्म हो गया है.

नाव रुकने के बाद कुछ देर स्थिर रही और फिर धीरे-धीरे जेठुली घाट के रास्ते से भटकने लगी और फतुहा की ओर बहने लगी. नाविक ने काफी प्रयास किया लेकिन धारा तेज होने के कारण वह बहती रही. इसी बीच एक नाव उधर से गुजरी, तो लोगों की जान में जान आयी. लेकिन वह नाव किसी व्यक्ति द्वारा बुक करा कर अपने काम से ले जायी जा रही थी.

उक्त नाव के नाविक ने मदद करने की कोशिश की लेकिन नाव पर सवार व्यक्ति ने मना कर दिया और अपने साथ लेकर चला गया. इसके बाद नाविक ने नाव के अगले छोर पर जा कर लाल झंडा दिखाया और हो-हल्ला किया. नाविक द्वारा लगातार प्रयास करने के बाद घाट पर रहे दो नाविकों ने सुन लिया और अपनी नाव से बीच गंगा में पहुंचे.

लेकिन वहां उस नाव से सटाने में काफी खतरा था. काफी मशक्कत के बाद नाव के सामने लाया गया. दोनों नावों से रस्सी फेंकी गयी और दोनों ही रस्सी को आगे से बांधा गया फिर दोनों नावों ने फंसी हुई नाव को खींचना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे जेठुली घाट की ओर नाव को लाया गया.

बीच गंगा में सांसत में फंसी रही लोगों की जान : नाव जैसे ही बीच गंगा में बंद हुई. सभी की हालत अनहोनी की आशंका से खराब होने लगी. नाव में ग्रामीणों के साथ ही वहां के सरकारी संस्थानों में काम करने वाले लोग भी थे. लोगों ने डर के मारे अपने-अपने परिजनों को फोन करना शुरू कर दिया था. जब घाट पर पहुंचे, तो फिर फोन पर परिजनों को सकुशल होने की जानकारी दी.


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