तमिलनाडु के छात्रों ने बनाई देश की पहली ऑटोमैटिक व्हीलचेयर

एयरपोर्ट और हॉस्पिटल में टेस्टिंग की तैयारी

रास्ता सिलेक्ट करते ही चेयर खुद आगे बढ़ने लगती है

चेन्नई.  तमिलनाडु में बीटेक के तीन छात्रों ने देश की पहली ऑटोमैटिक व्हीलचेयर बनाई है. ये चेयर खुद रास्ता खोजकर यूजर को एक से दूसरे स्थान तक ले जाने में सक्षम है. इसमें रोबोटिक ऑपरेटिंग सिस्टम (आरओएस) का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे गड्ढों और रुकावटों से बचाता है. आमतौर पर इस तरह की विदेशी चेयर काफी महंगी होती है, लेकिन अमृत विश्व विद्यापीठ के छात्रों ने इसे महज एक लाख रुपए से कम लागत में तैयार किया है.

लाखों मरीजों की जिंदगी हो सकती है आसान: छात्रों के साथ प्रोजेक्ट की निगरानी करने वाले प्रोफेसर आरके मेगालिंगम कहते हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो हम व्हीलचेयर की टेस्टिंग हॉस्पिटल और एयरपोर्ट पर भी करेंगे. अगर इस तकनीक का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाए तो व्हीलचेयर पर आ चुके लाखों लोगों की जिंदगी आसान हो सकती है. इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं. मरीजों को अब व्हीलचेयर चलाने के लिए जॉयस्टिक का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. अगर उन्हें स्मार्टफोन इस्तेमाल में परेशानी आती है तो घर का कोई सदस्य मोबाइल ऐप से चेयर को ऑपरेट कर सकता है.

कैसे काम करती है ऑटोमैटिक व्हीलचेयर: इंजीनियर छात्र चिंता रवि तेजा, शरत श्रीकांत और अखिल राज ने दो साल की मेहनत के बाद इसे बनाने में कामयाबी हासिल की है. छात्रों के मुताबिक, चेयर में लगा आरओएस आसपास का डायनामिक और स्टैटिक नक्शा तैयार करता है. लेजर सेंसर के जरिए यह नक्शा स्क्रीन पर दिखाई देता है. यूजर नक्शे में जिस जगह को सिलेक्ट करेगा, चेयर रास्ता खोजते हुए अपने आप उस दिशा में बढ़ने लगती है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यूनेस्को का एक डेलीगेशन 4 जुलाई को मुख्यमंत्री से मिला था.


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