जानें कौन था डॉन मुन्ना बजरंगी जिसने भाजपा नेता कृष्णकांत को मारी थी सौ गोलियां…

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के कुख्यात डॉन मुन्ना बजरंगी उर्फ प्रेम प्रकाश सिंह की आज सुबह बागपत जेल में हत्या कर दी गयी. इस हत्या के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार की किरकिरी हो रही है और जेल प्रशासन पर कई सवाल उठाये जा रहे हैं. हालांकि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच के आदेश दे दिये हैं. वहीं जेल के एडीजी ने बताया कि सुनील राठी के साथ उसका विवाद था और उसी ने बजरंगी को गोली मारी है, उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. जेल के सुपरिडेंडेट व डिप्टी सुपरिडेंडेट को सस्पेंड कर दिया गया है.

बजरंगी के वकील विकास श्रीवास्तव ने बताया कि आज मुन्ना बजरंगी की रेलवे से जुड़े एक मामले में कोर्ट में पेशी होनी थी, लेकिन उसके पहले ही उसे गोलियों से भून दिया गया. मुन्ना बजरंगी का शव खून से लथपथ जेल में वहां मिला जहां कैदी हाथ-मुंह धोते थे. सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आ रहीं हैं कि यह पूरी तरह से राजनीतिक षडयंत्र का परिणाम है.

कुछ दिनों पहले मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने आशंका जतायी थी कि उनके पति की हत्या हो सकती है. हत्या के षडयंत्र की आशंका इसलिए जतायी जा रही है क्योंकि जिस सुनील राठी ने बजरंगी की हत्या की वह उसके साथ ही बैरक में था. दोनों की पृष्ठभूमि राजनीतिक थी.

कौन था मुन्ना बजरंगी?
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का रहने वाला मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था. उसने एक बार स्वीकार किया था कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की. उसका जन्म 1967 में जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था. उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहता थे मगर मुन्ना बजरंगी ने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी. 15-16 की उम्र में उसने जुर्म की दुनिया में दस्तक दे दी थी. जब वह 17 साल का था तो उसपर अवैध हथियार रखने का पहला मामला दर्ज हुआ था.

अपराधजगत में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए उसने जौनपुर के डॉन गजराज सिंह का गैंग ज्वाइंन कर लिया. मुन्ना पर लगभग 40 हत्या का आरोप है. उसने पहली हत्या 1984 में की थी. मुन्ना बजरंगी ने भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या की थी.
मुख्तार अंसारी के गैंग को ज्वाइंन

अपनी बढ़ती ताकत को और बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी ने 90 के दशक में बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के गैंग को ज्वाइंन कर लिया. अंसारी को सपा का संरक्षण प्राप्त था और वे सपा के विधायक भी रहे थे. यहां से मुन्ना की इंट्री राजनीति में हुई और वह सरकारी ठेकों के लेन-देन में शामिल हो गया. यहीं से मुन्ना के दुश्मनों की लिस्ट लंबी हो गयी.

मुख्तार अंसारी को कृष्णानंद राय से चुनौती मिल रही थी और उन्हें अंसारी के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का संरक्षण प्राप्त था, बस क्या था मुन्ना को जिम्मेदारी मिली कृष्णानंद राय को खत्म करने की और मुन्ना ने वर्ष 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या लखनऊ हाईवे पर मुन्ना बजरंगी ने कर दी जिसके बाद पूरे प्रदेश के साथ ही देश में भी लोग मुन्ना बजरंगी से डरने लगे. इस हत्या में राय के साथ छह लोग मारे गये थे और किसी के शरीर में 60 से 100 गोलियां मारी गयीं थीं. वर्ष 2009 में जब उसकी मुंबई से गिरफ्तारी हुई तो वह एक फ्लैट में दो औरतों के साथ रहता था और अपनी पहचान छुपाने के लिए मुंबई में टैक्सी चलाता था.

मुन्ना ने बस कंडक्टर का काम भी किया था. कहा तो यह जाता है कि जब मुन्ना को यह भय सता रहा था कि उसकी हत्या हो सकती है तो उसने अपनी गिरफ्तारी करवा ली ताकि वह जिंदा रह सके. गिरफ्तारी के बाद उसने कहा था उसके कई दुश्मन हैं जो उसे मारना चाहते हैं और वह जबतक उन्हें खत्म नहीं करेगा उसे चैन नहीं आयेगा.


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