पुराने नोट जमा करने में 10 के खिलाफ चार्जशीट

बिहार में इस तरह की पहली चार्जशीट

गया: नोटबंदी के दौरान गया की बैंक ऑफ इंडिया जीबी रोड शाखा के पांच खातों में पुराने  नोट जमा करने के मामले में 10 के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहली  चार्जशीट दाखिल कर दी है. 10 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है. इनमें बैंक  के तत्कालीन चीफ मैनेजर एससी झा सहित तीन अफसर और हेड कैशियर भी शामिल हैं.
इस मामले में छह अन्य व्यवसायियों को भी अभियुक्त बनाया गया है. पटना  स्थित विशेष न्यायालय में इनके खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया गया है. नोटबंदी  से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बिहार में यह पहली चार्जशीट है.
दो हजार पन्नों की चार्जशीट : दो  हजार पन्नों की चार्जशीट में ईडी ने 10 लोगों को अभियुक्त बनाया है. इनमें  बैंक ऑफ इंडिया, जीबी रोड शाखा के तत्कालीन चीफ मैनेजर एससी झा, मैनेजर  हेमंत कुमार वर्मा, अरविंद कुमार और हेड कैशियर ओम प्रकाश नंद शामिल हैं.
इसके अलावा गया के मोती लाल, धीरज जैन, पवन जैन और विमल जैन को भी अभियुक्त  बनाया गया है. वहीं मां तारा एजेंसी, मुजफ्फरपुर के प्रोपराइटर राजेश  कुमार अग्रवाल और दिल्ली स्थित हरि कृपा के प्रोपराइटर राजेश कुमार गुप्ता  के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी है.
नोटबंदी में 10.93 करोड़ के पुराने नोट हुए थे जमा : गया  के जीबी रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के पांच खातों में नोटबंदी के  बाद 10.93 करोड़ के पुराने नोट जमा कराये गये थे. जिनके खातों में रकम जमा  करायी गयी, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी.
बाद में यह रकम देश के दूसरे  बैंकों में ट्रांसफर कर उसे निकाल लिया गया. मामला उजागर होने के बाद  ईडी  को इसकी जांच सौंपी गयी. ईडी पटना की टीम ने जांच में पाया कि गया के मोती  लाल पटवा ने ये पैसे बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से जमा कराये थे.
 
बैंक अधिकारियों से मिलीभगत
दिल्ली  के राजेश कुमार अग्रवाल और मुजफ्फरपुर के राजेश कुमार गुप्ता ने गया के  मोती लाल पटवा और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर जालसाजी की है. ईडी इस  मामले की जांच के बाद दिल्ली के राजेश कुमार अग्रवाल और मुजफ्फरपुर के  राजेश कुमार गुप्ता की 6.38 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है.

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