बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद (संशोधन) विधेयक, 2018 में संशोधन; अब सामूहिक सजा नहीं, बेल का भी प्रावधान

राज्य सरकार ने बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद (संशोधन) विधेयक, 2018 सदन में पेश कर दिया. इस संशोधन विधेयक में बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 की 16 धाराओं में बदलाव का प्रस्ताव है. नये विधेयक की कुल नौ धाराओं के अंतर्गत प्रावधानों में बदलाव होगा जबकि पांच धाराएं विलोपित की जायेंगी. एक धारा में संशोधन का प्रस्ताव है.
पहली बार नशे में पकड़े जाने का अपराध होगा जमानतीय : संशोधित विधेयक में पहली बार नशे में पकड़े जाने के अपराध को जमानतीय बनाया गया है. आरोपित व्यक्ति 50 हजार रुपये जुर्माना देकर या उसके बदले तीन महीने की सजा काट कर छूट सकेंगे. लेकिन, उसके बाद इसी अपराध में पकड़े जाने पर न्यूनतम एक से अधिकतम पांच साल तक की सजा भुगतनी पड़ेगी और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा.
हालांकि शराब के नशे में हंगामा करते पकड़े जाने का अपराध गैर जमानतीय होगा. इसके आरोपितों को पांच से दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा. बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 लागू होने के बाद शराब से जुड़े मामलों का बोझ न्यायालय पर बढ़ा है. करीब सवा लाख से अधिक मुकदमे विभिन्न न्यायालयों में चल रहा है, जिसकी सुनवाई में काफी दिक्कत हो रही है.
न्यायाधीशों की संख्या सीमित होने की वजह से एक-एक मुकदमे में लंबा वक्त लग जा रहा है. वहीं, जमानती कानून नहीं होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग भी जेलों में बंद हुए. महाधिवक्ता ललित किशोर की मानें तो संशोधन अधिनियम पुराने मामलों पर भी लागू होगा. ऐसे में बड़ी संख्या में पुराने मामले खत्म होंगे. इससे न्यायालयों, जेलों और पुलिस पर बढ़ रहा बोझ काफी घटेगा.
16 धाराओं में होगा बदलाव
बिहार मद्यनिषेध, उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2018 विधानसभा में पेश
 
नीतीश बोले- कानून में संशोधन निर्दोष को बचाने के लिए
पटना : जदयू विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा विकास के अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. राज्य में शराबबंदी कानून मजबूती से लागू है. सरकार विधानमंडल में शराबबंदी कानून में सुधार के लिए संशोधन विधेयक लायी है.
इसका मकसद है कि किसी निर्दोष को नाहक इस मामले में फंसाया नहीं जा सके. शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा के आवास पर शुक्रवार को आयोजित जदयू विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा समाज सुधार के लिए काम चलाया जायेगा. सरकार द्वारा जितना काम किया गया है
उससे लोगों को अवगत करायें. मुख्यमंत्री ने जदयू के सदस्यों को नसीहत दी कि वह विधानमंडल में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करायें. सभी सदस्य सदन की कार्यवाही में पूरी समय उपस्थित रहें.  जदयू के सभी सदस्यों को विपक्ष के सवालों को मजबूती से जवाब देने का सुझाव दिया.
जदयू विधायक दल की बैठक में संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, जल संसाधन और योजना एवं विकास मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह,  शिक्षा  मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा, पूर्व मंत्री श्याम रजक, संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार चौधरी  सहित अन्य सदस्य मौजूद थे.
धारा 56 के प्रावधान को भी बदला गया : किसी परिसर में शराब निर्माण व भंडारण अथवा ढुलाई में प्रयुक्त होने वाले साधन के अधिहरण को लेकर धारा 56 के प्रावधान को भी बदला गया है. इसमें उप खंड जोड़ते हुए कहा गया है कि राज्य सरकार यदि आवश्यक समझे तो तलाशी, जब्ती और अधिहरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश, विनियमन और अनुदेश निर्गत कर सकेगी.
परिवार के बालिग सदस्यों पर एफआईआर का प्रावधान हटेगा
सरकार ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक में धारा 32 के अंतर्गत भंडारण अथवा निर्माण के  मामले में परिवार के सभी बालिग सदस्यों पर केस दर्ज किये जाने के विवादित प्रावधान को भी हटा दिया है. किसी परिसर में शराब के भंडारण या निर्माण  की सूचना देने में विफल रहने वाले मकान मालिक या एजेंट पर कार्रवाई अब जमानतीय होगी. इन मामलों में उनको अधिकतम दो साल तक की सजा होगी.
शराब का निर्माण या भंडारण करने वाले व्यक्ति को अब पहले अपराध के लिए पांच साल से कम की सजा मिलेगी. लेकिन, इसके बाद उसे 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक की जुर्माने की सजा होगी. संशोधन अधिनियम में ‘ परिसर ‘ की परिभाषा को बदलते हुए इसमें चल संरचना जलयान, बेड़ा, वाहन आदि को जोड़ा गया है.
 
सामूहिक जुर्माने का प्रावधान होगा विलोपित
संशोधित विधेयक में धारा 35,  38, 53, 64 और 66 का विलोपन कर दिया गया है. इसमें धारा 35 बोतल या पैकेज बदल या कपट कर शराब की बिक्री करने, धारा 38 अपने परिसर में अवैध शराब के भंडारण की जानकारी होने के बावजूद प्रशासन को सूचित नहीं करने, धारा 53 दोबारा शराब के आरोप में पकड़े जाने पर दोगुना दंड, धारा 64 सामूहिक जुर्माना और धारा 66 शराब से जुड़े कुख्यात व आदतन अपराधियों के निष्कासन से संबंधित है. इसमें धारा 38 के आरोपित व्यक्ति को 08 से दस साल का कारावास और दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था.

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