केंद्र सरकार मॉब लिंचिंग के मामले में कठोर कदम उठाएगी

नयी दिल्ली : हाल के दिनों में देश में मॉब लीचिंग की घटनाओं में खतरनाक ढंग से वृद्धि हुई है. समाज में बढती दक्षिणपंथी ताकतें, सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर, बढती असहिष्णुता, गौ रक्षकों की बढती गतिविधियाँ आदि कारकों ने भीड़ के द्वारा स्पॉट पर न्याय करने की     प्रवृति को बढ़ावा दिया है. इससे अंतर्राष्ट्रीय समाज में भारत की छवि धूमिल हुई है और केंद्र सरकार को भी तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. ऐसे में अंततः केंद्र सरकार कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य हुई है. अब मॉब लिंचिंग को दंडनीय अपराध के तौर पर परिभाषित करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) में संशोधन की संभावनाओं पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. एक अधिकारी ने बताया कि एक मॉडल कानून का मसौदा तैयार करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकारें मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए अपना सकें. उन्होंने कहा कि सबकुछ शुरुआती चरण में है, क्योंकि केंद्र को नया कानून बनाने को कहने वाले सुप्रीम कोर्ट के समूचे आदेश के परीक्षण की आवश्यकता है.  हाल के दिनों में मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को इस पर सख्ती बरतने  का निर्देश दिया  है.


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