जब बर्लिन पर दिन रात एयर रेड चल रहा था और 40 लाख की रुसी फौज बर्लिन की ओर कूच कर रही थी

पुस्तक चर्चा 
Antony Beevor: Berlin; The Downfall: 1945
द्वारा: बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति 
इधर प्रयास है कि काफी तेज गति से पढ़ सकूँ. और जितना vast पढ़ सकूँ. इच्छा है कि बीबीसी हिंदी के सीनियर पत्रकार और मेरे प्रिय जौर्नालिस्ट रेहान फज़ल की तर्ज पर कहानियां लिख सकूँ. उसके लिए मुझे दो साल तो एकदम फ़ास्ट पेस में पढ़ना होगा, उसके बाद मै कुछ उम्मीद कर सकता हूँ. पर उन्हें द्रोणाचार्य समझकर एकलव्य की तरह साधना में लगा हुआ हूँ. अन्थोनी बीवर ने बेहतरीन किताब लिखी है द्वितीय विश्वयुद्द पर बर्लिन के अंतिम दिनों के बारे में, जब ईस्टर्न फ्रंट से सोवियत आर्मी बर्लिन की ओर बढ़ रही थी, और वेस्टर्न फ्रंट पर अमेरिकन और ब्रिटिश आर्मी बर्लिन की ओर बढ़ रही थी. बर्लिन पर दिन रात अलाइड फोर्सेज एयर रेड कर रही थी. दिन में अमेरिकन एयरफोर्स, और रात में ब्रिटिश एयर फाॅर्स. बर्लिन में अफ़सोस था कि जब पेरिस को जीता था नाज़ी फोर्सेज ने, तो उस समय क्यूँ नहीं उसे नेस्तनाबूद कर दिया, जिस तरह आज बर्लिन rubble का ढेर बन कर रह गया है.
शहर में 300000 विदेशी श्रमिक जमा थे, जिन्हें दिन रात फैक्ट्री में लगाया गया था जहाँ बंदूके, रायफल, टैंक बन रहे थे, पर चिंता थी तो फ्यूल की. बिना फ्यूल के कैसे लड़ें, कैसे ये टैंक चले?
बर्लिन चिंता में घिरा था, डॉक्टर गोब्बेल्स का प्रचार तंत्र जुटा हुआ था कि बर्लिन पर हमला नहीं होगा. हम जीतेंगे, हिटलर के पास सीक्रेट वेपन है, युद्ध के सारे नतीजे बदल जायेगे.
ऐसे में हिटलर ने प्रयास किया कि वेस्टर्न फ्रंट पर तेज हमला करके अमेरिकी फौजों को ध्वस्त करके Antwerp पर कब्जा जमाया जाए, जहाँ अलाइड फोर्सेज के हथियार जमा थे. पर Ardennes offensive नाजियों का अंतिम जबरदस्त प्रयास साबित हुआ. अमेरिकन फौजें टिक गयीं, और फिर एक सप्ताह में जब आकाश साफ़ हुआ, तो अमेरिकी बमवर्षक नाज़ी फौजों पर टूट पड़े, इस लड़ाई में 80,000 नाज़ी सैनिक खेत रहे. इसी बीच गोरिंग ने जर्मन एयर फाॅर्स के 1,000 प्लेन वेस्टर्न फ्रंट पर झोंक दिया, हिटलर को खुश करने के लिए, पर इस फ्रंट पर सारे जर्मन प्लेन ध्वस्त कर दिए गए और फिर उसके बाद एयर war पूरी तरह अमेरिकियों के हाथ में आ गया. जर्मन एयर फाॅर्स पूरी तरह ख़त्म हो चुका था.
नाज़ी आर्मी में भगदड़ मच रही थी. वेस्टर्न फ्रंट के जनरल चाह रहे थे कि अधिक से अधिक फ़ौज वेस्टर्न फ्रंट पर अमेरिकियों और ब्रिटिश के खिलाफ झोंकी जाए. जबकि ईस्टर्न फ्रंट पर रस्सियन आर्मी आगे बढ़ रही थी और जनरल Guderian के हाथ में रिपोर्ट थी कि 40 लाख की स्ट्रेंग्थ वाली रुसी फौजें विस्तुला नदी के किनारे तैयार हैं बर्लिन ओफ्फेंसिव के लिए. नाजियों के हाथ पैर फूल रहे थे. वे war के हर डिपार्टमेंट में पूरी तरह outnumbered थे.
इस बीच रूसियों और अमरीकियों के बीच Nuclear race शुरू हो चुका था. मेनहट्टन प्रोजेक्ट के बारे में रूसियों को अपने स्पाई डॉक्टर फूस से पता चल चुका था. डॉक्टर फूस ऑपरेशन मेनहट्टन में काम कर रहे थे और रूसियों के जासूस थे. ऐसे में स्टालिन प्लान कर रहे थे कि अमेरिकियों से पहले बर्लिन पहुंचना है. और वहां का पूरा नुक्लेअर इंस्टालेशन, युरेनियम और वहां काम कर रहे वैज्ञानिकों को कब्जे में ले लेना है.
बर्लिन की लोमहर्षक जंग शुरू हो चुकी थी. ये लड़ाई जितना नाजियों और अमेरिकियों और रूसियों के बीच थी, ये उतनी ही अमेरिकियों और रूसियों के बीच भी थी.
लेखक अन्थोनी बीवर ने इसका बेहतरीन विवरण पेश किया है. पढने योग्य किताब है. पढ़िए.

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