झारखंड में असम की तर्ज पर बंगलादेशी घुसपैठियों की पहचान की कवायद शुरू

साहेबगंज, राजमहल तथा बड़हरवा, जो सीमावर्ती प. बंगाल के मालदा तथा मुर्शिदाबाद सीमा से जुड़े हैं. ये इलाके  बांग्लादेश की सीमा से दूर नहीं हैं.

रांची.झारखंड सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को असम की तर्ज पर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (एनआरसी) तैयार करने आग्रह किया है. एनआरसी बनाने से संथाल परगना के बड़े इलाके में बांग्लादेशियों की घुसपैठ और उनके द्वारा गलत तरीके से भारत का मतदाता बनने पर रोक लगेगी. एनआरसी शुरू होते ही क्षेत्र विशेष में रह रहे लोगों को वंशावली के आधार पर भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र मिलेगा. साहेबगंज, राजमहल तथा बड़हरवा, जो सीमावर्ती प. बंगाल के मालदा तथा मुर्शिदाबाद सीमा से जुड़े हैं. ये इलाका बांग्लादेश की सीमा से दूर नहीं हैं.

अवैध रूप से भी बांग्लादेशी झारखंड में आ रहे थे
नियमानुसार यहां बांग्लादेशी नागरिक वैध पासपोर्ट और वीजा पर आते हैं. लेकिन अवैध रूप से भी बांग्लादेशी झारखंड में आ रहे थे. इसलिए राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से एनआरसी अपडेशन का आग्रह किया है. केंद्र की स्वीकृति मिलते ही एनआरसी अपडेशन का काम शुरू हो जाएगा. राजमहल से भाजपा विधायक अनंत ओझा लगातार विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया और एनआरसी अपडेशन की बात की.

क्या है एनआरसी

एनआरसी के तहत वंशावली का निर्धारण किसी कट ऑफ डेट को आधार मानकर किया जाता है. 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने असम में एनआरसी का आदेश दिया था. केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद असम में एनआरसी शुरू हुआ. इसके लिए वहां 1951 की जनगणना और 1952 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया. अर्थात इन दोनों सूचियों में वहां रह रहे लोगों के जिन पूर्वजों का नाम है, उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाण पत्र एसडीओ द्वारा दिया जा रहा है.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.