गोबर धन योजना का इस्तेमाल करके गावों को साफ रखें और बायो ऊर्जा का उत्पादन करें: रघुबर

19वी पशुधन जनगणना ( 2012) के मुताबिक़ भारत में मवेशियों की 30 करोड़ आबादी से प्रतिदिन लगभग 30 लाख टन गोबर प्राप्त होता है. ILO के एक अध्ययन (2014) के मुताबिक़ गोबर का प्रोडक्टिव तरीके से उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर 15 लाख रोजगारों का सृजन कर सकता है.

रांची: जानवर का गोबर, घर का कचरा, कृषि कार्य से उत्पन्न बेकार पदार्थों का उपयोग कर हम बायोगैस का उत्पादन कर सकते हैं. इससे न केवल हमें हरित ऊर्जा प्राप्त होगी, बल्कि हमारा गांव भी स्वच्छ रहेगा. ग्रामीण भी आत्मनिर्भर और सशक्त बनेंगे. स्वच्छता आते हीगांव में बीमारियां कम हो जाएगी. उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहीं. वे झारखंड मंत्रालय में गोबर-धन योजना पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे.

स्वयं सहायता समूह फेडरेशन मॉडल को 70 प्रतिशत तक की सबसिडी:मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गांव में उपलब्ध गाय समेत अन्य मवेशियों की सूची बनाएं. उन्हें इस योजना से जोड़ें. गांव के बाहर एक स्थान पर गोबर गैस प्लांट लगाएं। इससे हरित ऊर्जा के साथ-साथ ऑर्गेनिक खाद भी होगी. खाद को बेच कर राशि अर्जित करें. गोबर गैस प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार ग्राम पंचायत मॉडल को 100 प्रतिशत तथा स्वयं सहायता समूह फेडरेशन मॉडल को 70 प्रतिशत तक की सबसिडी दे रही है. मुखियागण, स्वयं सहायता समूह और लाभूक समिति मिल कर इसे जन आंदोलन बनाएं. इसमें राज्य सरकार हर संभव सहायता करेगी.

क्या है गोबर धन योजना?

बजट 2018-19 में गोबर धन योजना शुरू करने की घोषणा की गयी थी.  इस योजना का उद्देश्य पशुओं के गोबर और ठोस अवशिष्ट पदार्थो को कम्पोस्ट, बायो गैस और बायो CNG में बदलना है. इसके माध्यम से उद्यमियों को जैविक खाद, बायोगैस, बायो CNG उत्पादन के लिए गावों में क्लस्टर्स बनाकर इनमे पशुओं का गोबर और ठोस अवशिष्ट पदार्थों के एकत्रीकरण और संग्रहण को बढ़ावा देना है. फिलहाल प्रत्येक जिले में एक क्लस्टर का निर्माण करते हुए लगभग 700 क्लस्टर्स स्थापित करने की योजना है. इसके तहत जैव ऊर्जा मूल्य श्रृंखला के सभी श्रेणियों में छोटे और बड़े पैमाने पर परिचालनों को शामिल करते हुए विभिन्न व्यवसाय मॉडल विकसित किये जा रहे हैं.

19वी पशुधन जनगणना ( 2012) के मुताबिक़ भारत में मवेशियों की 30 करोड़ आबादी से प्रतिदिन लगभग 30 लाख टन गोबर प्राप्त होता है.कुछ यूरोपीय देशों और चीन द्वारा ऊर्जा उत्पादन के लिए पशुओं के गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाता है. लेकिन भारत इस तरह के अपशिष्ट की आर्थिक क्षमताओं का पूरी तरह लाभ उठाने में सफल नहीं हो सका है. दुनिया में सबसे बड़ी पशु संख्या के साथ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर की बड़ी मात्रा को धन और ऊर्जा में बदलकर इसका लाभ उठाने की क्षमता है. ILO के एक अध्ययन (2014) के मुताबिक़ गोबर का प्रोडक्टिव तरीके से उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर 15 लाख रोजगारों का सृजन कर सकता है. जैसे – एक किसान के लिए गोबर की बिक्री आय का एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त श्रोत सिद्ध हो सकता है.


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