बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 19771 करोड़ 42 लाख 18 हजार रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट पास

पटना : बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 19771 करोड़ 42 लाख 18 हजार रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पास कर दिया गया. इस पर चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने सदन को भरोसा दिलाया कि सूखा से लड़ने के लिए बजट की कमी नहीं है. विकास योजनाओं में भी धन की कमी नहीं आने दी जायेगी. हालांकि इस दौरान विपक्ष ने सदन का वॉकआउट किया. प्रथम अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष रखते हुए मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना पर 2221 रुपये खर्च किये जायेंगे.
मुख्यमंत्री अगले सप्ताह इस योजना का शुभारंभ करेंगे. सीएम के सात निश्चय में से एक स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर उन्होंने सदन को बताया कि बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम बनाया गया है. यह उच्च शिक्षा के 42 कोर्स के लिए चार लाख रुपये तक का लोन दे रहा है. 10वीं पास पालीटेक्निक करने वालों को भी इसका लाभ मिलेगा. लॉज या हॉस्टल में रहने के लिए 36 से 60 हजार रुपये तथा पाठ्य पुस्तक आदि खरीद के लिए 10 हजार रुपये का कर्ज का प्रावधान किया गया है. इसके लिए 525 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
मोदी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना पर मार्च 18 तक 60 लाख 67 हजार लोगों के खाते में पेंशन के पैसे भेज दिये गये हैं. लाभुकों की सूची में संशोधन की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि सूची से तीन लाख मृतकों के नाम हटाये गये हैं. वर्तमान में कुल लाभुकों की संख्या 64.66 लाख है. भागलपुर के बुनकरों को वन टाइम सैटलमेंट योजना का लाभ दिया जा रहा है. इसमें कुल बिल (ब्याज को छोड़कर)का 50 फीसदी जमा करना होगा. बिहार का आपदा प्रबंधन का कुल बजट 3114 करोड़ रुपये होगा.
विपक्ष का हंगामा : विधानसभा में दूसरी पाली में मुजफ्फरपुर बालिका गृह में लड़कियों से दुष्कर्म मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया. भोजनावकाश के बाद अध्यक्ष  विजय कुमार चौधरी ने जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की, राजद विधायक आलोक मेहता खड़े होकर नारेबाजी करने लगे. इसके बाद विपक्षी नारेबाजी करते हुए वेल में आ गये. आसन ने 4.45 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.
 
मधुबनी के तत्कालीन डीपीओ (स्थापना) पर होगी कार्रवाई : मोदी 
पटना. सरकारी राशि को निजी बैंक में रखे जाने के आरोप में मधुबनी के जिला शिक्षा अधिकारी के प्रभार में कार्यरत तत्कालीन डीपीओ (स्थापना) संजय कुमार पर बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी. विधान परिषद में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यह आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि सरकारी राशि को निजी बैंक में नहीं रखना है. डीपीओ (स्थापना) द्वारा निजी बैंक एक्सिस बैंक में खाता खोल कर राशि जमा की गयी. इस आरोप में डीपीओ (स्थापना) पर विभागीय प्रक्रिया कर बर्खास्त करने की कार्रवाई होगी. फिलहाल उन्हें निलंबित कर दिया गया है.
प्राकृतिक आपदा के समय भी राजनीति करना विपक्षी नेतृत्व की बचकानी हरकत : सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि जो लोग अपने शासनकाल में घोटालों से संपत्ति बनाने में मशगूल रहे.
जो पिछले साल सीमांचल के छह जिलों में भीषण बाढ़ से घिरे किसानों के बीच राहत-बचाव करने जाने के बजाय पटना में रैली कर रहे थे, वे सूखाड़ से निबटने के लिए डीजल अनुदान, सस्ती बिजली देने वाली एनडीए सरकार पर किस मुंह से अंगुली उठा रहे हैं. प्राकृतिक आपदा के समय भी राजनीति करना विपक्षी नेतृत्व की बचकानी हरकत है.
वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के भुगतान के लिए छह को होगी बैठक : कृष्णनंदन
पटना : शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा है कि वित्त रहित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षण संस्थानों को बकाया अनुदान राशि भुगतान करने के संबंध में एक कमेटी बनायी गयी है. इस कमेटी की बैठक छह अगस्त को होगी. बैठक के निर्णयों को अविलंब लागू करने की व्यवस्था की जायेगी. हाल में भी इस कमेटी की बैठक हुई थी.
इसमें उनके साथ ही वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव सहित उच्च अधिकारी और वित्त विभाग के सचिव सहित कई उच्च अधिकारी शामिल थे. वे बुधवार को बिहार विधान परिषद में भोजनावकाश के बाद ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का सरकार की ओर से जवाब दे रहे थे. परिषद में यह ध्यानाकर्षण प्रस्ताव विधान पार्षद संजय कुमार सिंह, संजीव श्याम सिंह, संजीव कुमार सिंह, नीरज कुमार, दिलीप कुमार चौधरी, वीरेन्द्र नारायण यादव, नवल किशोर यादव, मदन मोहन झा, केदार नाथ पांडेय और रित लाल राय ने पेश किया था. इसमें उन्होंने सरकार से मांग की थी कि बकाया अनुदान की एकमुश्त राशि और घाटानुदान का प्रावधान कब तक लागू किया जायेगा.
बालिकागृह मामले पर विपक्ष का सदन से वाॅकआउट
पटना : विधानसभा में बुधवार को भी मुजफ्फरपुर के बालिकागृह की बच्चियों के साथ हुए यौनशोषण का मामला उठा. सीबीआई जांच की मांग को लेकर विपक्ष वेल में आ गये. सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और वॉकआउट कर गये. हंगामे को देखते हुए अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी. सूखे पर विशेष चर्चा के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ कांग्रेस के विजय शंकर दुबे ने मुजफ्फरपुर मामले को उठाया और कहा कि विपक्ष इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है. सरकार को इसमें क्या परेशानी है. इसके बाद विपक्षी सदस्य शोरगुल करने लगे और वेल में आ गये. कुछ सदस्य टेबुल को पटकने लगे. करीब 15 मिनट तक यही स्थिति रही.  इस पर अध्यक्ष ने कहा कि सरकार इस मामले में सदन में अपनी बात रख चुकी है. विपक्ष सीबीआई जांच की मांग पर अड़े रहे और वेल में नारेबाजी की.
पास हुए छह विधेयक : बिहार विधान परिषद से छह विधेयक सर्वसम्मति से पास हो गये. इनमें बिहार वित्त विधेयक 2018 का प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी, दहेज प्रतिषेध (बिहार संशोधन) (निरसन) विधेयक 2018 का प्रस्ताव समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा और बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2018 का प्रस्ताव सदन में पशुपति कुमार पारस ने रखा.
‘आपदा पीड़ितों का सरकारी खजाने पर पहला हक’
पटना : विधानसभा में बुधवार को सुखाड़ पर विशेष चर्चा हुई. चर्चा के दौरान पक्ष व विपक्ष में जबरदस्त नोक-झोंक व टीका टिपण्णी होती रही. कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि सरकारी खजाने पर सबसे पहला हक आपदा पीडितों का है. उन्होंने विस्तार से सरकार की आेर से उठाये जा रहे कदमों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह मुस्तैद है. इस वर्ष राज्य में अब तक जुलाई माह में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है.  मात्र 8.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपनी हुई है, जो कि कुल रकबा का मात्र 25.63 प्रतिशत है.
विशेष चर्चा के दौरान पीएचईडी मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा कि राज्य में डबल इंजन की सरकार है.  विपक्ष राशि की चिंता न करें. जितनी राशि की जरूरत होगी दी जायेगी. पेयजल के लिए बंद पड़े चापाकलों को चालू किया जा रहा है. इसके लिए 557 गैंग लगाये गये हैं. हरेक प्रखंड में दो से तीन गैंग काम करेंगे.
जलसंकट वाले क्षेत्रों में टैंकर से पानी की आपूर्ति हो रही है. 4200 नया चापाकल लगाये जायेंगे. पशुओं के लिए 1500 जगहों पर पानी की व्यवस्था की जा रही है. आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं. किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि सरकार 10 एकड़ तक वाले किसानों को मुफ्त में बिजली दे. सूखा व बाढ़ से निबटने के लिए दूरगामी योजना बनाने की जरुरत है.
गया में बीठी बांध बनाकर मोकामा टाल तक पानी पहुंचाये. सरकार पूरे राज्य को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करे. राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि किसान की तरह राज्य सरकार भी इंद्र भगवान की तरफ देख रही है. सरकार राज्य के लोगों को खैरात खिलाने की जगह स्थायी व्यवस्था करे. बंद पड़ी बोरिंग चालू करे. महाराष्ट्र की तरह केंद्र बिहार को अनुदान दे. उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक होकर सूखे से लड़ने की अपील की.
 
विधान परिषद में उठा मैथिली भाषा के साथ भेदभाव का मुद्दा
विधान परिषद में मैथिली भाषा के प्रति भेदभाव व उपेक्षा करने का मामला उठा. कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा ने शून्यकाल में कहा कि अष्टम सूची में शामिल होने के बावजूद बिहार के स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल सूची में मैथिली भाषा नहीं है, जबकि बंगला व फारसी भाषा शामिल है. यह आश्चर्यजनक व एक भाषा के प्रति भेदभाव व उपेक्षा को दर्शाता है.
उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की. दिलीप कुमार चौधरी ने सूचना के माध्यम से बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड में अध्यक्ष की नियुक्ति शीघ्र किये जाने के संबंध में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया. इधर, विधान परिषद में राजद के सुबोध कुमार ने राज्य में शिक्षा की बदहाल स्थिति पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया. उन्होंन कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति मैट्रिक व इंटर की परीक्षा सही ढंग से करने व रिजल्ट प्रकाशित करने में विफल रही है. बोर्ड अध्यक्ष मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं.
डॉ रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि इंटर के छात्रों का स्नातक में नामांकन के लिए बिहार बोर्ड के नये नियम से छात्र व अभिभावक परेशान हैं. इस पर बहस होनी चाहिए. कार्यकारी सभापति ने नियमन का हवाला देते हुए कार्य स्थगन प्रस्ताव अमान्य कर दिया.
पटना : जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा है कि विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव बिहार के पहले जन्मजात कॉरपोरेट पॉलिटिशियन हैं. 
जन्म से ही सोने की चम्मच से भोजन करने वाले राजद नेता खुद को गरीब का बेटा बताते हैं. उनके नाम से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कितनी जमीन की रजिस्ट्री करा रखी है इसका भी लेखा  जोखा नहीं होगा. जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि यह तो हैरत की बात है कि तेजस्वी को किसानों की फिक्र हो रही है.
15 वर्षों में लालू परिवार ने बिहार में कृषि की आधारभूत संरचना को ध्वस्त कर दिया. किसान राज्य से बाहर पलायन को मजबूर हो गये. शासन में रहते हुए लालू परिवार ने केवल अपनी फिक्र की. आज वह किसानों के लिए सूखे पर चिंता जता कर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं.
किसानों की चिंता कैसे की जाती है इसका उदाहरण राज्य की जनता देख रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूखे की स्थिति को देखते ही कैबिनेट की बैठक बुलाकर डीजल अनुदान बढ़ाने का निर्णय लिया. सूखे और किसानों पर तेजस्वी की राजनीति नहीं चमकी तो सियासी रोटी सेंकने मुजफ्फरपुर चले गये.  जिस घटना पर सरकार लगातार एक्शन में है. पुलिस लगातार जांच के साथ कार्रवाई कर दोषियों को पकड़ रही है.

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