ट्रक हड़ताल का असर फलों और सब्जियों की कीमतों पर पड़ना शुरू

सब्जियों की कीमतों में लगभग 20 फीसदी और फलों की कीमतों में करीब 10 फीसदी की उछाल
पटना : डीजल को जीएसटी के दायरेे में लाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी)  हड़ताल पर है. आज हड़ताल का सातवां दिन है. हड़ताल का असर शहर के बाजारों पर नजर आने लगा है. पटना में सब्जियों और फलों की कीमतों में उछाल आया है. पटना की थोक मंडियों में आवक कम होने से सब्जियों की कीमतों में लगभग 20 फीसदी और फलों की कीमत में करीब 10 फीसदी का उछाल आया है. इसका असर किराना कारोबार पर भी हुआ है. रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी होनी शुरू हो गयी हैं.
एमपी, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान से खाद्यान्न की सप्लाई होती है.
ट्रक चालकों की हड़ताल 19 जुलाई से शुरू हुई, लेकिन 23 जुलाई से  असर दिखना शुरू हो गया. हड़ताल के बाद से लगभग हर सब्जी की कीमत में 5 से 10 रुपये तक का इजाफा हो चुका है. एक सप्ताह पहले टमाटर 30 रुपये से 35 रुपये प्रति किलो था. वह 40 रुपये से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. करैला 25 रुपये से बढ़ कर 30 से 35 रुपये तक पहुंच गया है.
आवक कम और मांग अधिक : मीठापुर थोक सब्जी मंडी में सामान्य दिनों में 20 से 22 ट्रक सब्जियां आती हैं, लेकिन हड़ताल के बाद से मंडी में 12-14 ट्रक ही आ रहे हैं. इससे सब्जियों की आवक कम और मांग अधिक हो गयी है. इसका फायदा कारोबारी उठा रहे हैं.
कारोबारी अनिल कुमार ने बताया कि टमाटर बेंगलुरु, प्याज और बंद गोभी नासिक से आ रहे हैं, लेकिन कारोबारी ऑर्डर कम दे रहे हैं. देर होने के कारण माल खराब होने का डर है. आलू पश्चिम बंगाल से आ रहा है लेकिन आठ की जगह चार-पांच ट्रक ही सप्लाई हो रही है.  कुछ सब्जियां सारण, छपरा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बिहारशरीफ और हाजीपुर से आ रही हैं.
हड़ताल का व्यापक असर : बिहार ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भानु शेखर प्रसाद सिंह का कहना है कि हड़ताल पूरी तरह सफल है. खास कर दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रकों की संख्या लगभग 85 फीसदी कम है. लेकिन आवश्यक सामानों को नहीं रोका जा रहा है.
20% कम पहुंच रहे ट्रक: कारोबारियों की मानें तो बाजार समिति में 20 फीसदी ट्रक कम पहुंच रहे हैं. यहां के थोक कारोबारी भीम कुमार ने बताया कि हड़ताल का असर है लेकिन अन्य शहरों की तुलना में कम है. फिर भी माल समय से नहीं आ रहा है. ट्रक चालकों को जगह -जगह हड़ताल समर्थकों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है.
जो फल यहां तीन-चार दिनों में पहुंचने चाहिए वह आज की तारीख में वे पांच से सात दिनों में पहुंच पा रहे हैं. पहुंचने में देर होने से माल भी खराब हो रहा है. इसकी भरपाई करने के लिए कीमत को बढ़ाना पड़ रहा है.
कीमत एक नजर में
l किलो करैला Rs 30 – 35
l किलो बैगन Rs 30 – 35
l किलो नेनुआ Rs 25 – 30
l किलो  परवल Rs 25 – 30
l किलो भिंडी Rs 25 – 30
l किलो टमाटर Rs 40 – 50
l किलो बोरा Rs 30 – 35
l किलो लौकी Rs 20
कच्चा केला Rs 20 – 30 प्रति दर्जन
l किलो पालक साग Rs 30
l किलो लाल साग Rs 30

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