बीटीईटी 2011 शिक्षक भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

पटना.बीटीईटी 2011 शिक्षक भर्ती घोटाले का मास्टर माइंड व वरीय लिपिक अमित को एसआईटी ने सहयोगी सुजीत के साथ गिरफ्तार कर लिया। सुजीत भी बोर्ड का लिपिक है। दोनों बोर्ड के आईटी शाखा में ही पदस्थापित थे। अमित ने अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए पुलिस से कहा कि वह और सुजीत मिलकर करीब 200 से अधिक अयोग्य शिक्षकों की बहाली करवा चुके हैं। रिजल्ट में हेरफेर कर दोनों ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।
अमित दलाली के पैसे से गर्दनीबाग में एक फ्लैट और 10 लाख से अधिक मूल्य की एक लग्जरी खरीद चुका है। वहीं सुजीत का राजीव नगर इलाके में अपना मकान है। दोनों ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। पूछताछ के बाद कई और कर्मियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस जल्द ही कुछ और गिरफ्तारी करेगी। एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि अमित ही मास्टर माइंड है। कुछ और कर्मियों के नाम सामने आए हैं। जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

200 दलालों के संपर्क में थे दोनों:शिक्षक बहाली के अलावा दलालों के माध्यम से कई और काम बोर्ड के शातिर करते रहे हैं। पूछताछ में दोनों ने कई तरह के लूट का खुलासा किया। कहा- वह और उनके साथी राज्यभर के करीब 200 दलालों के संपर्क में हैं। दलाल इन कर्मियों की अकूत कमाई का जरिया हैं। अमित अपने पिता की जगह पर अनुकंपा पर बहाल हुआ था। जब तक उसके पिता नौकरी किए किराए के कमरे में रहे। 2009 में अमित बोर्ड में बहाल हुआ और मात्र नौ साल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा। यही हाल सुजीत और फरार बोर्ड कर्मी माइकल का है।

5 से 8 लाख तक वसूली गई थी राशि:अमित ने पुलिस को बताया कि वह फर्जी शिक्षकों की बहाली करवा कर अबतक 40 लाख से अधिक की कमाई कर चुका है। हालांकि, एसआईटी का मानना है कि दलाली के पैसों से उसने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। गिरफ्त में आए बोर्ड कर्मियों की संपत्तियों का भी जायजा लिया जा रहा है। जांच टीम में जुटे अधिकारियों की माने तो एक कैंडिडेट से 5 से 8 लाख तक की राशि ली जाती थी। वैसे कैंडिडेट जो फेल हो गए थे और उन्हें पास होना था, उनसे 5 लाख रुपए लिए जाते थे। वैसे कैंडीडेट जो परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए, उनसे 8 लाख रुपए मांगे जाते थे। कंप्यूटर के डेटाबेस में बदलाव के लिए अमित एक कैंडिडेट से डेढ़ लाख रुपए लेता था और टेबुलेशन रजिस्टर में बदलाव के लिए जटाशंकर और उसके सहयोगी डेढ़ लाख वसूलते थे। बाकी के दो लाख प्रति कैंडिडेट दलालों का होता था।

दो स्तरों पर होता था फर्जीवाड़ा:अमित और उसके सहयोगी के पास उस कंप्यूटर का पासवर्ड था, जिसमें रिजल्ट सेव था। मोटी रकम लेकर वे रिजल्ट में फेरबदल कर देते और फेल कैंडिडेट को पास दिखा देते थे। वैसे लोगों का नाम भी पास वाली लिस्ट में भर देते थे, जो परीक्षा में बैठे ही नहीं। दूसरा फेरबदल टेबुलेशन रजिस्टर में होता था। इसके लिए अमित कैंडिडेट को अभिलेखागार के प्रभारी जटाशंकर और सहयोगी अमितेश के पास भेजता था। दोनों मोटी रकम लेकर टेबुलेशन रजिस्टर से पेज फाड़ कर नया पेज जोड़ देते थे।


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