स्तनपान सप्ताह 1-7 अगस्त: सभी धर्मों ने स्तनपान को माना है महत्वपूर्ण

बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन के तहत किया गया धर्मगुरुओं  के राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

स्‍तनपान नवजात मृत्यु दर को 20 फीसदी तक और 5 साल से कम उम के बच्‍चों के मृत्यु दर को 20 फीसदी तक कम करता है। स्‍तनपान, डायरिया से होने वाली मौत को सभावना को 11 गुणा कम करता है।

पटना 31 जुलाई 2018 : आज पटना के होटल पाटलिपुत्र अशोक में विश्‍व स्‍तनपान दिवस 1-7 अगस्‍त के उपलक्ष्‍य में बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन के पहल के तहत यूनिसेफ के द्वारा स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए धर्मगुरु/धार्मिक संस्थाओँ  की भूमिका पर राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला  का उद्देश्य बिहार में स्तनपान को बढ़ावा देना और धार्मिक संगठनों की सहायता से समाज में व्याप्त मिथकों  को दूर करना  था.  कार्यशाला का उद्घाटन आत्मा कल्याण केंद्र के आचार्य सुदर्शन, इमारते शरिया  के सचिव अनिसुर रहमान,  खानकाह मुनेमिया  के सैयद शमीमुद्दीन अहमद, नाजिम इदारे शरिया,  हाजी सनाउल्ला, अंबेडकर मिशन के बुद्ध  शरण हंस, जैन मंदिर के विजय कुमार जैन,  यूनिसेफ बिहार के प्रमुख असदुर रहमान विश्‍व गायत्री परिवार के युवा प्रकोष्ठ के राजीव कुमार, त्रिपोलिया की कम्‍यूनिटी मेडिसिन इंचार्ज सिस्‍टर मोनिका मैन्युअल  और मशाल फाउंडेशन की निदेशक सिस्टर ज्योतिशा ने किया।

 

इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों ने स्‍तनपान को बढाने में धार्मिक संस्थाओँ के प्रतिनिधियों एवं धर्मगुरु की भूमिका विषय पर बनी फैक्टशीट का विमोचन किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को स्तनपान के मुख्य संदेशों पर बानी शार्ट फिल्म का प्रदर्शन किया गया।  अंत  में सभी धर्म गुरुओं ने अपनी संस्थाओं के माध्यम से स्तनपान के बारे में लोगो को जागरूक करने का शपथ लिया।

 

अनिसुर रहमान ने कहा कि अगर कोई माँ अपने बच्चे को पहला दूध नहीं पिलायेगी तो वो कसूरवार होगी. पिता की भूमिका के बारे में बताते हुए उन्‍होनें कहा कि कुरान के अनुसार ये पिता की जिम्मेवारी है की वो स्तनपान करवाने वाली माँ का खान पान और आराम का धयान रखें। कुरान कहता है की कोई दूसरी औरत भी अगर किसी बच्‍चे को दूध पिलाती है तो भी उसके लिए वह माँ होगी इससे पता चलता है कि मां के दूध को कुरान में बहुत अहमियत दी है। इमारते शरिया इसे एक मजहबी जिम्मेदारी मानकर बिहार के बच्‍चों को पोषण को बेहतर करने के लिए पूरा सहयोग देंगा और विश्‍व स्‍त्‍नपान सप्‍ताह के दौरान हम लोगों को इसके बारे में जागरूक करेंगें।

आत्म कल्याण केंद्र के आचार्य सुदर्शन ने कहा कि छोटे बच्‍चे भगवान का रूप का होते हैं, हम बच्‍चों के साथ अन्‍याय कर रहे हैं। धर्मो और हमारे वेदों में 16 संस्‍कार की चर्चा की गई है  जिसमें पहला गर्भधारण संस्कार है। उन्‍होनें कहा कि मैनें देखा है कि स्‍तनपान करवाने से माताओं की सुंदरता बढ जाती है। कुछ महिलाओं

बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन के बारे में बताते हुए खानकाह मुनेमिया के सैयद शमीमुद्दीन अहमद ने कहा कि यह बाकि दूसरे इंटरफेथ फोरम से अलग हैं यह मंच क्रिएटर के सबसे सुन्दर क्रिएशन बच्चों के लिए है। यह फोरम उन बच्चों के बेहतरी के बारे में सोचने के लिए बना है जो बिहार की आबादी का ४६ प्रतिशत है ! उन्होंने आह्वान किया कि सभी धर्म संस्थानों में माताओ और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के लिए एक नियत स्थान हो। अजान के बारे में बताते हुए उन्‍होनें कहा कि बच्‍चें के जन्‍म के बाद अजान के लिए किसी मौलाना, हाफिज आलिम की जरूरत नहीं हैं ये कोई भी दे सकता हैं ताकि बिना देर किए बेटा या बेटी को स्‍तनपान करवाया जा सकें।

यूनिसेफ बिहार के प्रमुख असदुर रहमान ने कहा कि हर बच्‍चे को चाहे वो किसी भी धर्म, जाति या समाजिक पृष्ठभूमि के हो बिना किसी भेदभाव के स्‍तनपान का अधिकार है। बच्‍चों के पोषण पर 1 रूपये का निवेश 16 रू के  के बराबर होता है। NFHS 4 के आंकडों के अनुसार बिहार में केवल 35 फीसदी बच्‍चों को ही जन्‍म के 1 घंटे के अंदर स्‍तनपान कर पाते है।

अंबेडकर मिशन के बुद्ध शरण हंस ने कहा कि लोगों में स्‍तनपान की जानकारी का अभाव है। बौद्ध धर्म के प्रचारक सम्राट अशोक शिलालेखों के अनुसार गर्भवती मताओं की  देखभाल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी समाज  की है। स्‍तनपान सही से सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्‍यक है कि मां के पोषण पर घ्‍यान दिया जाए।

दिगंबर जैन मंदिर के विजय कुमार जैन ने कहा कि बच्‍चे का सही लालन पालन नहीं होने से पूरे समाज का भविष्‍य अधंकारमय हो जाएगा। मां का दूध  6 माह तक बच्‍चे के पोषण के लिए पर्याप्त है। 6 माह के बाद बच्‍चों को मां के दूध के साथ दाल, दलिया, फल, सब्‍जी इत्‍यादि देना चाहिए।

विश्‍व गायत्री परिवार के युवा प्रकोष्ठ के राजीव कुमार ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि स्‍तनपान के बारे में पिता और मां दोनेा को जागरूक करने की जरूरत है क्‍योकि पिता की भी भूमिका काफी महत्वपूर्ण इसके साथ ही हमें स्‍तनपान को अपने-अपने व्‍यवहार में लाने की जरूरत है।

त्रिपोलिया की कम्‍यूनिटी मेडिसिन इंचार्ज सिस्‍टर मोनिका मैन्युअल  ने कहा कि जन्‍म के बाद जब स्‍तनपान के दौरान बच्चे और माँ के बीच त्‍वचा से त्‍वचा का संपर्क होता हैं जिससे मां में दूध बनने की प्रक्रिया तेज  होती है।

हाजी एस एम सनाउल्‍लाह ने कुरान के अनुसार बच्‍चे को पहला दूध पिलाना मां के लिए वाजिब है। यह बच्‍चों में प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।

जीवका के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी अपोलो पूर्ति ने कहा कि जीविका गांवों में स्‍तनपान के बारे में जागरूक्‍ता फैलाती है। उन्होंने कहा की जीविका की हर सदस्य किसी न किसी धर्म से जुडी हैं ऐसे में धर्मगुरुओं के सन्देश का बहुत की व्‍यापक प्रभाव है। जीविका की यह कोशिश है कि जन्‍म के 1 घंटे के अंदर सभी बच्‍चों को मां का दूध मिल जाएं।

समेकित बाल विकास सेवा के राज्‍य सलाहकार राहुल कुमार  ने बच्‍चों और मां के पोषण के लिए शुरू किए गए पोशन मिशन के बारे में बताया।

यूनिसेफ की पोषण अधिकारी डॉ शिवानी दर ने स्‍तनपान के बिहार के आंकडों के बारे में बताते हुए कहा कि जन्‍म से 6 माह तक केवल 53 फीसदी बच्‍चों को ही केवल स्‍तनपान करवाया जाता है। मां के दूध के जैसा कुछ भी नहीं है। स्‍तनपान का कोइ विकल्‍प नहीं है। स्‍तनपान नवजात मृत्यु दर को 20 फीसदी तक और 5 साल से कम उम के बच्‍चों के मृत्यु दर को 20 फीसदी तक कम करता है। स्‍तनपान, डायरिया से होने वाली मौत को सभावना को 11 गुणा कम करता है।

सभी अतिथियों का स्‍वागत  करते हुए यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्‍ता ने कहा कि धर्म गुरूओं की भूमिका हमारे समाज में काफी महत्वपूर्ण है। बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन का गठन 1 साल पहले बिहार के बच्‍चों के बेहतरी के लिए यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से किया गया था।

कार्यक्रम का संचालन बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रन की कोर कमिटी  सदस्‍य सिस्‍टर ज्‍योतिशा ने किया । इस अवसर पर विभन्‍न  धर्मो और धार्मिक संसथाओं के 100 से ज्‍यादा लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर यूनिसेफ से मोना सिन्‍हा, सोनिया मेनन, बिंसी थामस भी उपस्थित रही। धन्‍यवाद ज्ञापन विकासार्थ की सचिव सुनीता सिंह ने दिया।


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