TISS के रिपोर्ट के बाद भी 55 दिनों तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई? तेजस्वी का नीतीश को खुला पत्र

इतना  सब कुछ होता रहा लेकिन सरकार के एक भी तंत्र या सूत्र के कानों पर जूं तक नही रेंगी. एक प्राईवेट संस्थान ने जब इसकी रिपोर्ट दी तो 55 दिनों तक कोई कार्रवाई ही नहीं की गई.

पटना:राजद नेता तेजस्वी यादव ने  मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड पर नीतीश को खुला पत्र लिखा है. इसमें चुन-चुन कर बिहार के समाज कल्याण विभाग से हुई गलतियों को उठाया गया है. तेजस्वी ने बिहार में नीतीश पर लगातार विफलता का आरोप लगाकर उनसे तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी है.

तेजस्वी ने लिखा है कि आदरणीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी, आपकी महीनों की रहस्यमयी चुप्पी देखकर मुझे यह खुला पत्र लिखने पर विवश हुआ हू. यह विशुद्ध रूप से ग़ैर-राजनीतिक पत्र है क्योंकि एक सामाजिक कार्यकर्ता होने से पहले मैं सात बहनों का भाई, एक मां का बेटा और कई बच्चियों व भगिनी का चाचा और मामा हूं. बच्चियों के साथ हुई इस अमानवीय घटना से मैं सो नहीं पाया हूं. आप कैसे चुप रह सकते हैं यह आपसे बेहतर कौन जानता होगा?

तेजस्वी ने लिखा है कि मैं दुःखी हूं क्योंकि जिनकी खिलौनों से खेलने की उम्र थी वो खिलौना बन गईं. चलो मान भी लें कि वो हमारी बेटी थोड़ी ना थी, अनाथ थी, बेसहरा थी, अभागी थी, मजबूर थी, वो जो भी थी पर हमारी लाड़ली बेटी थोड़ी ना थी. हम क्यों बोलें? वो हमारी कुछ नहीं लगती थीं. उनके पीछे कोई गांव, पंचायत, समाज और पार्टी नहीं है क्योंकि वो बेसहारा है. वो अनाथ मासूम लड़कियां किसी का वोटबैंक नहीं है इसलिए हमें क्या लेना देना? उनसे हमारा कोई रिश्ता थोड़े ना था, वह लुटती रहीं, पिटती रहीं, शर्मशार होती रहीं, बेइज्जत होती रहीं, रोती रहीं, कराहती रहीं, चीख़ती रहीं, मरती रहीं. और बिहार की नीतीश सरकार गहरी नींद में सोती रही.

तेजस्वी ने लिखा है कि नीतीश कुमार बिहार के मुखिया हैं. प्रदेश में किसी भी प्रकार के संकट में बिहार की जनता नीतीश की क्रिया देखती है लेकिन ऐसे घिनौने कृत्य पर उनकी घोर चुप्पी सवाल खड़े करती है. प्रदेश के मुखिया के तौर पर आपकी भूमिका संदेहास्पद है. आपको बेटियों के लिए अपना मुंह खोलना होगा. उन्हें सुरक्षा और आत्मसम्मान के साथ जीने का आश्वासन देना होगा. आप ऐसे गूंगे नहीं बन सकते. पत्थर दिल मत बनिए. अगर प्रदेश नहीं संभल रहा तो इस्तीफ़ा दीजिए क्योंकि बिहार की न्यायप्रिय जनता और संस्थागत सामूहिक रेप की घटनाएं ना ही देखना चाहती है और ना ही सुनना. अगर आपमें ज़मीर बचा है तो बोलिए.

तेजस्वी यादव को कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपकी सरकार के संरक्षण में उनका ऐसा शोषण हुआ जिसके बारे में सोच कर रूह कांप जाती है. अब आप कहेंगे कि बिहार सरकार के संरक्षण में कैसे यह हुआ तो एक बार जरा गौर से उस बालिका गृह का बोर्ड देख लीजिएगा. उसके सबसे ऊपर लिखा है ‘बिहार सरकार’, उसके नीचे लिखा है ‘समाज कल्याण विभाग’, फिर उसके नीचे लिखा है ‘राज्य बाल संरक्षण समिति’ तब जाकर लिखा है बालिका गृह. मैं यह नहीं कहता कि वह बालिका गृह किसी ब्रजेश ठाकुर का था, मैं तो यह कहता हूं कि वह बालिका गृह बिहार सरकार का था जिसके मुखिया नीतीश कुमार जी हैं. बलात्कार पीड़ित बच्चियों का आरोपी ब्रजेश ठाकुर अपनी गिरफ्तारी के बाद भी बेशर्मी से हंस रहा था. क्योंकि, वह जानता है कि उसने जिसकी-जिसकी सेवा की वह सब खुद को बचाने के लिए उसको बचाएंगे.

राजद नेता ने लिखा है कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह की यह घटना मानवीय इतिहास में अब तक की सबसे क्रूरतम और शर्मनाक घटना है. संस्थागत रूप से इतना सब कुछ होता रहा लेकिन सरकार के एक भी तंत्र या सूत्र के कानों पर जूं तक नही रेंगी. एक प्राईवेट संस्थान ने जब इसकी रिपोर्ट दी तो 55 दिनों तक कोई कार्रवाई ही नहीं की गई. जब मैंने सदन में मामला उठाया तो आपके संसदीय मंत्री श्रवण कुमार ने सदन को गुमराह किया. क्या आपके अधिकारियों ने यह नही बताया कि वह एफआईआर दर्ज करने जा रहे हैं ? किस मदहोशी में आपकी सरकार काम कर रही है? मुख्य आरोपी का तो नामज़द प्राथमिकी में नाम भी नहीं है.


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