मीडिया जगत का ‘मास्टरस्ट्रोक’, पीएम मोदी की आलोचना के कारण पुण्य प्रसून को छोड़ना पड़ा चैनल

मशहूर शायर अकबर इलाहबादी का एक मशहूर शेर है- ‘खींचों न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो.’ यह शेर अखबार की ताकत को बताने का एक बेहतरीन जरिया था, लेकिन समय के साथ अखबार की ताकत को बताने का यह शेर फीका और बेदम सा हो चला है. आज अखबारी दुनिया जिसे मीडिया कहते हैं, उसकी भीड़ तो लगी है, हर पल की खबर पल-पल पर नजर, लेकिन उसकी ताकत कहीं खो सी गयी है. कलम की धार भोथरी होती दिखती है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति मीडिया की आत्मा को जीवित रखना चाहता है और यह कहना चाहता है कि कारपोरेट होती पत्रकारिता के बीच अभी भी कुछ ऐसा शेष है, जो मीडिया को मुर्दा होने से रोक सकता है , तो उसपर नकेल कस दी जाती है. जी हां, हालिया मामला मशहूर टीवी चैनल ‘ABP’ न्यूज से जुड़ा है, जहां एक मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और प्राइम टाइम एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी को इस्तीफा देना पड़ा है और एक एंकर अभिसार शर्मा को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को यह मामला संसद में उठाया और आरोप लगाया कि पीएम मोदी की आलोचना करने की वजह से चैनल पर दबाव डालकर एडिटर और एंकर्स को हटाया गया.लेकिन सरकार ने आरोप को खारिज कर दिया है.

सरकार विरोधी खबर दिखाने का ‘मास्टरस्ट्रोक’

‘ABP’ न्यूज में जो कुछ हुआ उसका एकमात्र कारण मात्र यही है कि इन्होंने कुछ ऐसे सच देश के सामने लाये, जिससे नागरिक अनजान थे और यही मीडिया का दायित्व एक प्रजातांत्रिक देश में चिह्नित है, लेकिन वह सच सरकार के अधिकारियों को पसंद नहीं आया और उन्होंने अपनी नाराजगी सीधे ट्‌वीट करके जाहिर कर दी. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और खेल मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने #UnfortunateJournalism हैशटैग के साथ सरकार के खिलाफ ABP न्यूज पर दिखायी गयी खबरों की आलोचना की थी. बस फिर क्या था चैनल पर लगाम कसने लगी और सरकारी एड बंद कर दिये गये और प्राइवेट एड पर भी आफत आ गयी, तो अंतत: चैनल ने एडिटर और दो एंकर को मजबूर कर दिया. इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल  गांधी ने ट्‌वीट भी किया था.

विवाद की वजह

जानकारी के अनुसार गत जून माह में पुण्य प्रसून वाजपेयी के कार्यक्रम ‘मास्टरस्ट्रोक’ में छत्तीसगढ़ की एक महिला किसान का इंटरव्यू दिखाया गया था, जिसमें यह बताया गया था कि पीएम मोदी से वीडियो काॅन्फ्रेंसिग के जरिये बातचीत से पहले कुछ लोग उनके पास आये थे और यह कहा था कि जब पीएम नरेंद्र मोदी से बात हो आय दुगुनी हो जाने की बात कहे. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की रहने वाली चंद्रमणि कौशिक नाम की महिला किसान ने पीएम मोदी से बातचीत की थी और कार्यक्रम में बताया था कि उसकी आय दुगुनी हुई है, जिसका इंटरव्यू चैनल ने किया था. इस प्रोग्राम के प्रसारित होने के बाद मंत्रियों ने चैनला की निंदा की और विपक्ष ने सरकार की आलोचना. जिसकी वजह से इन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा.

क्या है विज्ञापन के जरिये दबाव बनाने का फंडा

मीडिया की दुनिया में आज के दौर विज्ञापन यानी एडवरटिजमेंट का बड़ा महत्व है, क्यों कि आम आदमी जो अखबार पांच रुपये में खरीद कर पढ़ता है और जो चैनल और वेबसाइट वह दिनभर फाॅलो करता है कास्टिंग बहुत ज्यादा होती है. एक अखबार को छपाना और एक चैनल और वेबसाइट को चलाना बहुत कठिन काम है जिसके लिए पैसों की सख्त जरूरत होती है. कर्मचारियों की तनख्वाह, छपाई और मैनटेनेंस का खर्च बहुत आता है, जिसके लिए मीडिया वल्र्ड को पैसों की जरूरत होती है और वह आता है सरकारी और गैरसरकारी विज्ञापनों से.मीडिया हाउसों को अपने कब्जे में रखने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर एड देती है, लेकिन जैसी ही सरकार की त्यौरियां चढ़ी तो फिर एड बंद, इसलिए मीडिया हाउस की सरकारें चुप हैं.

घटी है संपादकीय विभाग की महत्ता, कंटेंट अब नहीं रहा किंग

प्रभाष जोशी और हरिवंश जैसे पत्रकारों की पत्रकारिता का अंत होने के बाद पत्रकारिता लगातार कमजोर हुई है. इनके राज में जिस संपादकीय विभाग की बातें सर्वोपरि होती थीं आज वह विज्ञापन विभाग के हाथों की कठपुतली है. विज्ञापन विभाग को इस बात का अभिमान है कि वह रेवन्यू लेकर आता है. इसलिए अखबार उसके कांधे पर चलती है संपादकीय विभाग के नहीं, इसलिए वह जैसा कहेगा उस लाइन पर स्टोरी और खबरें करनी पड़ेगी. परिणाम यह हुआ है कि मीडिया जगत में जो कंटेंट कभी ‘किंग’ कहलाता था आज वह ‘क्वीन’ बन गया है. उसका महत्व घटा है और कंटेंट के साथ-साथ कई और चीजें भी महत्वपूर्ण हों गयी हैं.


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