मुजफ्फरपुर बालिका गृह काण्ड: जब रिपोर्ट मिलने के बाद भी मंजू वर्मा ने एक्शन नहीं लिया

पटना. मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ी. पूरा देश बच्चियों के यौन शोषण पर उद्द्वेलित है. विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर बिहार बंद का भी आयोजन किया था. राजद लगातार नीतीश कुमार पर हमले कर रहा है. ऐसे में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा ने कहा  कि उन्हें इसका पता नहीं था. हालांकि सच यह है कि उनके विभाग को समय-समय पर बालिका गृह की खराब हालत की रिपोर्ट मिली, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. बाल अधिकार संरक्षण आयोग बिहार की कमिश्नर डॉ एच कौर ने 2017 में ही बालिका गृह की स्थिति पर रिपोर्ट दी थी और उसे खाली करने को कहा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ.

बंद कर रखी जाती थी बच्चियां
बाल अधिकार संरक्षण आयोग बिहार की कमिश्नर डॉ एच कौर ने कहा कि मैंने 2017 में बालिका गृह का दौरा किया था. मैंने देखा था कि वहां लड़कियों को ताले में बंद कर रखा जाता था। जब मैंने सवाल किया कि बच्चियों को बंद कर क्यों रखा गया है. जवाब मिला- खुला रखने पर ये भाग जाती हैं। लड़कियां भाग न सकें इसके लिए रूम में ताले लगाए जाते हैं.

कौर ने कहा कि बालिका गृह में 51 लड़कियों को छोटी जगह पर बंद कर रखा जाता था. न शिक्षा की कोई व्यवस्था थी और न स्वास्थ्य सुविधा. जब मैं बच्चियों से मिली वे डरी सहमी थीं. इसके बाद हमने समाज कल्याण विभाग में रिपोर्ट सबमिट किया. अपनी रिपोर्ट में मैंने लिखा था कि मुजफ्फरपुर के बालिका गृह और इसके संचालक पर कड़ी कार्यवाही की जाए. पर मेरी जानकारी में कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुई.

देश भर में समाज कल्याण मंत्री द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किये जाने पर आक्रोश व्याप्त है. उनके इस्तीफे की मांग जोर शोर से उठ रही है. इस काण्ड में उनके पति का नाम उछल कर आ रहा है.


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