एक ही बीमारी की दो दवाओं में जमीन आसमान का अंतर; डॉक्टर भी महँगी दवाई लिख रहे

मलेरिया की दवा मुख्य रूप से आर्टेमेदर नामक रसायन से बनाई जाती है. यह रासायनिक तत्व अत्यंत सस्ता है. फिर भी इससे बनाई जाने वाली दवाएं काफी महंगी हैं.

पटना । दवा कंपनियों की लूट से मरीजों की माली हालत और दयनीय हो रही है. वर्तमान में एक ही बीमारी की अलग-अलग कंपनियों की दवाओं की कीमत में कई गुना तक अंतर है. उदाहरण के लिए मलेरिया की दवा की एक कंपनी द्वारा मात्र 20.43 रुपये में आपूर्ति की जा रही है. वहीं दूसरी कंपनी द्वारा इस बीमारी की दवा 1696 फीसद महंगी यानी 346.50 रुपये में बेची जा रही है. यानी मलेरिया की दवा की कीमत में 1696 फीसद का अंतर. अधिकांश डॉक्टर महंगे इंजेक्शन ही गरीब मरीजों को लिख रहे हैं. यह तथ्य राजधानी के इंदिरा गाधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) के फार्माकोलॉजी विभाग द्वारा किए गए रिसर्च में उजागर हुआ है. यह शोध वर्ष 2016 से मार्च 2018 तक किया गया.

 

संस्थान के फार्माकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. हरिहर दीक्षित के अनुसार बिहार के लिए मलेरिया प्रमुख बीमारी है. एक शोध के अनुसार देश में प्रतिवर्ष 1.5 मिलियन मरीज मलेरिया की चपेट में आते हैं. इनमें लगभग एक हजार मरीजों की मौत हो जाती है. इस वर्ष जनवरी से लेकर मार्च तक 115 मलेरिया के केस राज्य में दर्ज किए गए हैं. बरसात के दिनों में मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है.

 

मलेरिया की दवाओं पर रिसर्च करने वाले डॉ. ललित कुमार का कहना है कि 100 से अधिक कंपनियों की दवाओं की कीमतों का अध्ययन करने पर पाया गया कि उनकी कीमतों में काफी अंतर है. मलेरिया की दवा मुख्य रूप से आर्टेमेदर नामक रसायन से बनाई जाती है. यह रासायनिक तत्व अत्यंत सस्ता है. फिर भी इससे बनाई जाने वाली दवाएं काफी महंगी हैं.

 

कई कंपनिया सरकारी नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं:

दवाओं की कीमत के निर्धारण के लिए केंद्र सरकार द्वारा नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी बनाई गई है. लेकिन कई कंपनियां इस एजेंसी से दूर हैं. वे बाजार में अपने उत्पाद को बेचती हैं, लेकिन सरकार का उनपर कोई नियंत्रण नहीं होता है. यदि सरकार उनपर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करे तो मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार ने हार्ट एवं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं के दाम में कमी की है. हालांकि, मलेरिया जैसी बीमारी की दवाओं की कीमत में कोई कमी नहीं की गई है. इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.


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