दैनिक भास्कर के ग्रुप एडिटर को खुदकुशी के लिए मजबूर करने वाली महिला पत्रकार गिरफ्तार, सुनें बातचीत का अाॅडियो

इंदौर : वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक को खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में पुलिस ने उनकी पूर्व सहकर्मी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि महिला पत्रकार पांच करोड़ रुपये की उगाही के लिये याग्निक को लम्बे समय से धमका रही थी कि वह उन्हें झूठे मामले में फंसाकर बदनाम कर देगी. पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरिनारायणाचारी मिश्रा ने आज संवाददाताओं को बताया कि सलोनी अरोरा (43) को कल मुंबई से गिरफ्तार किया गया है. वह पुलिस से बचने के लिए पखवाड़े भर से महाराष्ट्र के अलावा दिल्ली, गोवा और गुजरात में छिपती फिर रही थी. याग्निक (55) प्रमुख हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर के समूह संपादक थे .

उन्होंने इस अखबार की इंदौर स्थित तीन मंजिला इमारत की छत से 12 जुलाई की रात कथित तौर पर छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी. डीआईजी ने बताया कि सलोनी हिन्दी अखबार के मुंबई स्थित दफ्तर में कुछ समय पहले पदस्थ थी और मुख्यत: मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग करती थी. आरोप है कि अखबार की नौकरी से निकाले जाने के बाद वह याग्निक को मानसिक तौर पर परेशान कर रही थी जिससे वह भारी तनाव में चल रहे थे. उन्होंने कहा कि पुलिस को फोन कॉल रिकॉर्डिंग के कुछ अंश मिले हैं, जिसमें याग्निक से सलोनी पांच करोड़ रुपये की कथित मांग करती सुनायी पड़ रही है. आरोप है कि इस बातचीत के दौरान महिला पत्रकार याग्निक को धमकी दे रही है कि यह रकम नहीं चुकाये जाने पर वह उन्हें झूठे मामले में फंसाकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल कर देगी. मिश्रा ने कहा, “हमारी जांच के मुताबिक सलोनी की कथित मानसिक प्रताड़ना के कारण ही याग्निक ने आत्महत्या की थी.

वह संपादक को कम से कम आठ महीने से मानसिक तौर पर बुरी तरह परेशान कर रही थी.” डीआईजी ने बताया कि धन उगाही के लिए याग्निक पर दबाव बनाने के मकसद से सलोनी सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो वायरल भी कर चुकी थी, जो महिला पत्रकार और संपादक के बीच फोन पर हुई बातचीत से जुड़े हैं. वह मोबाइल नम्बर बदल-बदलकर याग्निक को फोन पर धमकाती थी. उन्होंने बताया कि महिला पत्रकार के खिलाफ याग्निक के परिजनों और उनके कुछ सहकर्मियों ने भी पुलिस को बयान दर्ज कराये हैं. डीआईजी ने पुलिस की अब तक की तहकीकात के हवाले से कहा कि याग्निक को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने में फिलहाल सलोनी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के शामिल होने की बात सामने नहीं आयी है. हालांकि, मामले में जब्त सबूतों के आधार पर विस्तृत जांच जारी है.

इस बीच, पुलिस ने सलोनी को आज एक स्थानीय अदालत में पेश किया. अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर उसे पूछताछ के लिये नौ अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. बहरहाल, इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं क्योंकि खुदकुशी का कदम उठाने से करीब 10 दिन पहले याग्निक ने इंदौर रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) अजय कुमार शर्मा से मिलकर आपबीती सुनायी थी कि महिला पत्रकार उन्हें कथित तौर पर धमका रही है . उन्होंने इस बारे में एडीजी को औपचारिक पत्र भी सौंपा था. यह पूछे जाने पर कि इस पत्र के आधार पर पुलिस ने महिला पत्रकार के खिलाफ समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, डीआईजी ने जवाब दिया, “यह पत्र केवल सूचनात्मक प्रकृति का था. तब याग्निक ने सलोनी के खिलाफ किसी पुलिस कार्रवाई की गुजारिश नहीं की थी.

हमने उनके अनुरोध पर ही इस पत्र को गोपनीय रखा था.” उन्होंने कहा कि इस पत्र के जरिये याग्निक ने बस इतना निवेदन किया था कि अगर महिला पत्रकार पुलिस को उनके खिलाफ कोई शिकायत करती है, तो इस शिकायत पर किसी तरह का कानूनी कदम उठाये जाने से पहले एक बार उनका पक्ष भी सुना जाये. याग्निक की खुदकुशी के बाद पुलिस ने सलोनी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 306 (आत्महत्या के लिये उकसाना), 386 (किसी व्यक्ति को गंभीर नुकसान के भय में डालकर उससे उगाही) और 503 (आपराधिक रूप से धमकाना) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की सम्बद्ध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.


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