मुख़्तसर सी ज़िन्दगी के अजीब से अफ़साने हैं: शाईस्ता अंजुम के शेर

आज आपका परिचय शायरा और कवियित्री शाइस्ता अंजुम से करवाते हैं. शाइस्ता अंजुम पटना में रहती हैं, उन्होंने पटना विश्विद्यालय से विमेंस स्टडीज में एमएम किया है. 

मुख्तसर सी ज़िंदगी के, अजीब से अफ़साने हैं…

यहाँ तीर भी चलाने हैं, और परिंदे भी बचाने हैं…!!

 

कागज पर उतर आती है
एक खामोश सा चेहरा
मेरी नजरें वो देखती हैं
जेल मे बंद उन नन्ही जिन्दगी को
मेरी नजरों ने उन तडपती आँखों को देखा है
अजीब सा संनाटा हैं
जैसी कोई खामोश नदी बह रही हो
ऐ समाज के लोगों तुम कब आओगे
अपने बाहों को कब फैलाओगे
जेल कि जिन्दगी से डर लगता हैं अपनों का चेहरा साफ दिखता है
मैं भी इस समाज का हिस्सा हु
रात कि काली सायों से डरती हू
मुझे को अपनालो मेरी लज्जा बचालो

 

अभिलाषा
मेरी अभिलाषा थी उडने की
ऊंचे गगन को छूने की
पंख लगा कर उड़ती जाऊँ
तोड़ कर लाऊँ नभ से तारे
अभिलाषा मेरे मन मे रह गई
पिंजरे मे कैद होकर रह गई
कैसे होती मे आजाद
पंख जो मेरे काट डाले आज
कैसे मे बाहर आऊँ
डर के मारें काप सी जाऊँ
मैं एक असहाय सी पक्षी
दूनिया बडी कठोर सी लगती
कया मैं आजाद हो पाऊगी
उँचे गगन मे उड पाऊगी
जाने पूरी कब होगी
मेरी यह अभिलाषा

 

मैं कड़ी धूप मे चली
अपनी आबरू के लिए लड़ी
मैंने जरा शोर मचाया
जमाने को अपना दर्द बताया
बात बहुत सीधी थी
आहो से भरी थी
लोगों ने कया किया
तमाशा सरेआम किया
कया समझाऊँ लोगों को
मैंने कितनी हिम्मत दिखाई
जब अपने होंठों से अपनी
लुटती आबरू की दास्तान बताई
वजूद मेरा तिनका तिनका हो गया
लोगों ने मेरे दर्द को धर्म से जोड़ दिया
हवा का रुख बदल गया है
हर तरफ दरिदों का राज हो गया है
घर मे बैठी बेटी भी महफूज नहीं
समय यह कैसा
रात तो क्या दिन मे भी डर सी जाऊँ
मैं कहा महफूज हूँ
कोई मुझे यह बताऐं

 

कुछ उलझे सवालो से डरता हे दिल़,
जाने क्यों तन्हाई में बिखरता हे दिल़,
किसी को पाने कि अब कोई चाहत न रही,
बस कुछ अपनों को खोने से डरता हे ये दिल़ !!!

 

ये किसान पेड़ से कयो लटक गया
नेता अपने वादे से कयों भटक गया
जिसका बदन कडी धूप मे जल गया
वो किसान अपने हक से दूर हो गया
लोग इनसाफ की आवाज उठाते हैं
न्याय जो हैं रास्ते मे ही अटक जाती हैं
सुबह होतीं है शाम आती है
फिर भी अँधेरा सरे आम आती हैं
हर किसानों का दिल कयो रोता है
कपड़े उजले हैं दिल मैला कयो हैं
आँखों के आसूं दर्द बताते है
फिर भी किसान अनाज उगाते हैं!!

 

नजरों से बातें किया करो
शब्द मतलब बदल देते है
कुछ बातें आँखों से कहो
और एक कहानी बने!!

 

खूबिओ से नही होती पहचान मेरी
कुछ कमियाँँ भी रखती हु
कुछ दर्द ऐसे हैं जिसे
दिल मे दबा कर रखती हूं
मै तो वैसी पछीं हुँँ
जो खुले आकाश मैं भी कैद रहती हूं!!

 

जब भी करीब आती हूँ बताने के लिए;
जिंदगी दूर कर देती है सताने के लिए;

महफ़िलों की शान न समझना मुझे;
मैं तो अक्सर हँसती हूँ गम छुपाने के लिए!!

 

 


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