चम्पा विश्वास बलात्कार काण्ड: जब एक आईएस ऑफिसर अपनी बीबी की इज्ज़त बचाने में नाकामयाब रहा

Balendushekhar Mangalmurty is Editor-in-Chief of marginalised.in

बिहार की राजनीति इसके सामंती धरातल से उभरी है. इसने बाहुबलियों, अपराधियों को पनाह दी है. नतीजा अक्सर चौकाने वाली घटनाएं हो जाती हैं, जिससे बिहारी समाज दहल जाता है, लेकिन चूँकि ये सुसुप्त समाज है, इसलिए कुछ देर के बाद फिर सो जाता है. बिहार इसकी बड़ी कीमत चुका रहा है.

1998 में जब एक सीनियर आईएस ऑफिसर की पत्नी चम्पा विश्वास ने आरोप लगाया कि राजद MLA हेमलता यादव के बेटे मृत्युंजय यादव और उसके साथियों ने उसके साथ दो साल से लगातार जबरन बलात्कार किया, धमकाया, तो बिहार के राजनीतिक गलियारे में हडकंप मच गया. सहसा 1982  की बॉबी सेक्स और ह्त्या काण्ड लोगों के जेह्न में गूंजने लग गए. पर इतना ही काफी नहीं था. इस किताब के और पन्ने थे.

चम्पा विश्वास ने आरोप लगाया कि सिर्फ उसके साथ ही बलात्कार नहीं हुआ, बल्कि उसकी माँ, उसकी दो नौकरानियों, उसकी ननद, और विश्वास की भतीजी कल्याणी के साथ भी मृत्युंजय यादव और उसके साथियों ने बलात्कार किया.

30 वर्षीया चम्पा विश्वास सीनियर आईएस ऑफिसर बी बी विश्वास की पत्नी थी. 1982 बैच के आईएएस अधिकारी बीबी विश्वास उन दिनों समाज कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात थे़  तब राजद नेत्री हेमलता यादव समाज कल्याण बोर्ड की चेयरमैन थी़  दोनों के सरकारी आवास आसपास ही थे. चंपा ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपित नेत्री के पुत्र 27 वर्षीय मृत्युंजय यादव  ने दुष्कर्म के लिए न सिर्फ आपराधिक दबाव बनाया और चुप रहने की धमकी दी, बल्कि हिंसा के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ और सरकारी नौकरियों के वादे का प्रलोभन देकर उनके परिजनों का यौनशोषण किया था़ चंपा ने यह भी कहा कि उसे जबरन एक बार गर्भपात भी कराया गया था़. उसने बताया कि गर्भ ठहरने के बचने के लिए उसने नसबंदी का सहारा भी लिया.   उसने यह भी कहा कि उसकी दो नौकरानी और भतीजी गायब हैं. और उसने ये शंका जाहिर की कि कहीं दोनों को मार न दिया गया हो.

तब मृत्युंजय यादव ने लालू की बायोग्राफी लिखी थी और राजद सुप्रीमो लालू यादव का बेहद करीबी था.

राज्यपाल के नाम चिट्ठी ने केस को दबने से बचाया 

मामला बिहार पुलिस की फाईल में कहीं दब जाता और समय के साथ मर जाता, अगर चम्पा विशवास ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सूचना नहीं दी होती.

चंपा विश्वास और उनके पति आईएएस अधिकारी बीबी विश्वास ने आरोपों की पूरी कहानी का ब्योरा तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी को सौंपा था़  आईएएस अधिकारी की पत्नी की इस शिकायत पर राज्यपाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस मामले में उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया और इसके बाद राज्य स्तर पर डीजीपी (प्रशासन) नियाज अहमद ने पुलिस को जांच का आदेश दिया.

यह ऐसा मामला था, जिसमें आईएएस अधिकारी होने के बावजूद, बीबी विश्वास यौनशोषण से अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों की रक्षा में असहाय थे़  वहीं ब्यूरोक्रेसी भी असहज महसूस कर रही थी़ शिकायत के कुछ दिन बाद श्री विश्वास और उनका परिवार दिल्ली चला गया़  चंपा विश्वास का कहना था कि उनके पति का जीवन खतरे में था और इसलिए उन्होंने एक सुरक्षित स्थान पर जाने का फैसला किया था़ दूसरी ओर नेत्री का बेटा अपने को निर्दोष बताता रहा़.

इस मामले को और हवा मिली, जब भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने प्रेस कांफ्रेंस किया और कहा कि ये काण्ड साबित करता है कि इज्ज़तदार परिवारों की महिलायें भी राजद कार्यकर्ताओं के सामने बेबस हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि कुछ भी करके वे बच सकते हैं.

पुरे काण्ड ने बिहार की सामूहिक सोच को झकझोड़ कर रख दिया. लोग आश्चर्य में पड़ गए कि एक आईएस ऑफिसर भी अपनी पत्नी की इज्ज़त बचाने में नाकामयाब रहा.

आरोप प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा: 

फिर इसके बाद आरोप प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा. सबके पास कहने के लिए कुछ था. जैसा कि उम्मीद थी, मृत्युंजय यादव ने इस पुरे प्रकरण को नकारा: “मै इन आरोपों से हैरान हूँ. ये मेरी माँ और मेरे के खिलाफ एक राजनीतिक षड्यंत्र है.” हालाँकि उसका ट्रैक रिकॉर्ड उसके बयान के खिलाफ जा रहा था. इस घटना के तीन साल पहले पुलिस ने उसे एक राजनेता की बेटी को molest करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.

राजद नेता और विधान सभा में पार्टी व्हिप मोहम्मद नेमतुल्लाह ने इस पुरे प्रकरण को नकारते हुए कहा कि मै हेमलता यादव के परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ. मै जानता हूँ कि ये लड़का इस तरह की हरकत नहीं कर सकता है.

उधर चम्पा विश्वास की कहानी में भी कई गैप पाए गए. कई सवाल उठे. चम्पा विश्वास ने शिकायत करने में इतना वक्त क्यों लिया? ऐसा कैसे हुआ कि इतनी महिलाओं का बलात्कार हो रहा था और पुरे दो साल तक कोई आवाज नहीं उठी.  बी बी विश्वास ने अपने पोजीशन का इस्तेमाल करते हुए कोई एक्शन क्यों नहीं लिया?

पुलिस के अधिकारियों के पास अपनी कांस्पीरेसी थ्योरी थी. उनके अनुसार ये हो सकता है कि ३० वर्षीया चम्पा विश्वास और २७ वर्षीय मृत्युंजय यादव के बीच अफेयर रहा हो, लेकिन बात तब बिगड़ गयी होगी, जब उसने अपने मित्रों के लिए भी सेक्सुअल फेवर माँगा होगा. तब चम्पा विशवास की रिश्तेदारों और नौकरानियों के खिलाफ यौन हिंसा का दौर शुरू हो गया होगा. गर्भपात और नसबंदी शायद शुरुआत में अफेयर की ओर इशारा कर रहे हों.

उधर हेमलता यादव ने आरोप लगाया कि चम्पा विशवास के आरोप उसके पति बी बी विश्वास के इशारे पर लगाए गए हैं, क्योंकि unauthorised leave पर रहने के कारण बी बी विशवास पर विभागीय कार्यवाही चल रही थी. इसलिए वे दोनों दिल्ली डर से नहीं भागे हैं, बल्कि जांच से बचने के लिए भागे हैं.

चीफ सेक्रेटरी एस एन विश्वास ने अफ़सोस जाहिर किया कि विश्वास दंपत्ति ने दो सालों से कुछ क्यों नहीं बोला. पुलिस अधिकारीयों के अनुसार विभाग में 250 लोगों की नियुक्ति में गड़बड़ी के मुद्दे पर विश्वास जांच के घेरे में चल रहे थे.

तमाम तरह के आरोप प्रत्यारोप चल रहे थे, पर जले पर नमक मृत्युंजय यादव ने छिडका: “बिहार की राजनीति में ऐसे आरोप कई बार फायदेमंद हो जाते हैं.”

बिहार ने इस काण्ड से कुछ नहीं सीखा:

हालांकि इस काण्ड में बिहार को हिला कर रख दिया, पर बिहार ने इस काण्ड से कुछ नहीं सीखा. अगले ही साल 1999 में  आत्मा को झकझोर कर रख देने वाला शिल्पी जैन- गौतम सेक्स और हत्याकांड सामने आया, जिसके तार एक बार फिर राजद नेता से जुड़े थे. हाल फिलहाल तेजस्वी यादव मुजफ्फरपुर बालिका गृह काण्ड में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, पर दुर्भाग्य से उनकी पार्टी के नेता राज्बल्लभ यादव बलात्कार के आरोप में घिरे, तो उन पर उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की. एक युवा नेता की असंवेदनशीलता ने फिर मन को कचोटा.

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