बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र के हर प्रखंड में बनेगा एक-एक मॉडल विलेज

सीमावर्ती क्षेत्र से आबादी का पलायन नहीं हो, इसके लिए बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकास के काम होते हैं.
पटना : बिहार के सीमावर्ती सात जिलों के सभी 110 प्रखंडों के एक-एक गांव को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जायेगा. पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ राज्य सरकार की हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है. इन गांवों में न सिर्फ आधारभूत संरचना बल्कि रोजगार  के साधन को भी विकसित किया जायेगा. यह सब बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत होगा. अब केंद्रीय गृह मंत्रालय इस कार्यक्रम की ऑनलाइन मॉनीटरिंग करेगा.
 
बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकास
सीमावर्ती क्षेत्र से आबादी का पलायन नहीं हो, इसके लिए बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकास के काम होते हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय इसके लिए राशि भी देता है और इसकी निगरानी भी करता है.
इसके तहत सीमावर्ती सभी गांवों में विकास काम होगा, लेकिन हर प्रखंड में एक-एक गांव को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जायेगा. योजना एवं विकास विभाग ने इसका खाका भी तैयार कर लिया है. विभाग के संयुक्त सचिव सुनील कुमार यादव ने बताया कि सीमावर्ती गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है.
इसके अलावा रोजी-रोजगार के लिए यहां की आबादी बाहर नहीं  जाये इसके लिए रोजगार के अवसर को बढ़ाया जायेगा. इन गांवों के नौजवानों को कौशल विकास कार्यक्रम से भी जोड़ा जा रहा है. स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावना को तलाशा जा रहा है.

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