हड़ताल पर गए NMCH और PMCH के डॉक्टर, 6 मरीज की मौत

पटना. नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) के डॉक्टर की पिटाई के विरोध में गुरुवार को पटना के सरकारी अस्पताल के करीब 1000 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। इलाज नहीं मिलने की वजह से 6 मरीजों की मौत हो गई। एनएमसीएच और पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर के हड़ताल की वजह से अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। इमरजेंसी और ओपीडी दोनों के जूनियर डॉक्टरों हड़ताल पर हैं। इस वजह से मरीज और उनके परिजनों को काफी परेशानी हो रही है। इलाज के लिए दूसरे जिलों से आए मरीज डॉक्टरों की हड़ताल से काफी आक्रोशित हैं।

पीएमसीएच में 30 ऑपरेशन टले
हड़ताल की वजह से पीएमसीएच में 30 ऑपरेशन टालने पड़े। परिजन मरीज को प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाने को विवश हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जो प्राइवेट हॉस्पिटल का बिल नहीं भर सकते।

पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर विनय ने कहा कि सरकार सिर्फ आश्वसन देती है। कभी पीएमसीएच के डॉक्टरों की सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया जाता। हमलोगों ने 24 घंटे का हड़ताल किया है। सुरक्षा देने की हमारी मांग नहीं मानी जाती है तो आगे और हड़ताल किया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री बोले-डॉक्टरों की सुरक्षा से नहीं होगा कोई खिलवाड़
-हड़ताल कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि मारपीट करने वाले आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाए। साथी ही मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट भी जल्द लागू हो। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का कहना है कि पीएमसीएच और एनएमसीएच के जूनियर डॉक्टर तुरंत काम पर वापस लौटें। डॉक्टरों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है और उनके साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। प्रधान सचिव जूनियर डॉक्टरों से बात कर रहे हैं और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। डॉक्टरों से मारपीट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मंगलवार शाम जूनियर डॉक्टरों ने एक मरीज की मौत के बाद परिजनों को शव सौंप दिया था। परिजन शव लेकर चले गए और थोड़ी देर बाद शव को वापस ले आए। परिजनों का कहना था कि डॉक्टरों ने जिंदा मरीज को मृत घोषित कर दिया। समझाने के बाद भी परिजन नहीं माने और जूनियर डॉक्टरों से मारपीट की। लगातार हो रही मारपीट की घटना को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने काम का बहिष्कार कर दिया है।


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