जब नीतीश ने बाजी पलट दी और हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति बने

बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने हरिवंश को राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित होने पर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के उपसभापति के रूप में अपनी पार्टी के सांसद हरिवंश को मिली नयी जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए दीं. नीतीश ने कहा कि हरिवंश जी कलम के धनी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में इनका अमूल्य योगदान रहा है.

जदयू  सांसद हरिवंश के आज राज्यसभा के उपसभापति चुने जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह समाज के निचले स्तर के लोगों से जुड़े रहे हैं और उनके अनुभवों से पूरे सदन को लाभ मिलेगा. उन्होंने हरिवंश और उनके प्रतिद्वंद्वी बी के हरिप्रसाद के चुनाव में होने पर चुटकी लेते हुए कहा कि ‘सदन पर हरिकृपा बनी रहेगी.’ प्रधानमंत्री ने उच्च सदन में हरिवंश को शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘आज नौ अगस्त है. आजादी के आंदोलन में अगस्त क्रांति बहुत महत्वपूर्ण है. अगस्त क्रांति का बलिया से विशेष संबंध है. 1857 की क्रांति से लेकर आजादी के आंदोलन तक बलिया आंदोलन का बिगुल बजाने में अग्रणी रहा है. स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे से लेकर चंद्रशेखर तक यह परंपरा रही है. उसी कड़ी में आज एक और नाम जुड़ गया है, हरिवशंजी. ‘ मोदी ने कहा, ‘उनका जन्म जयप्रकाशजी के गांव में हुआ और आज भी वह उस गांव से जुड़े हुए हैं. जयप्रकाश के सपनों को साकार करने के लिए जो ट्रस्ट चल रहा है, वह उसके ट्रस्टी के रूप में भी काम करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘ हरिवंश उस कलम के धनी हैं जिसने अपनी खास पहचान बनायी है. मेरे लिये यह भी खुशी की बात है कि वह बनारस के विद्यार्थी रहे थे. उनकी शिक्षा दीक्षा बनारस विश्वविद्यालय में हुई और वहीं से उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए किया. रिजर्व बैंक ने उन्हें पसंद किया किंतु उन्होंने रिजर्व बैंक को पसंद नहीं किया. बाद में घर की परिस्थितियों के कारण उन्होंने राष्ट्रीयकृत बैंक में काम किया. उन्होंने दो साल हैदराबाद में एक बैंक में काम किया.” प्रधानमंत्री ने कहा कि वह कभी हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता में रहे. पर हरिवंश को इन महानगरों की चकाचौंध कभी नहीं भाई. उन्होंने कोलकाता में वरिष्ठ पत्रकार एसपी सिंह के साथ रविवार पत्रिका में काम किया था. उन्होंने एक प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में धर्मयुग में धर्मवीर भारती के साथ काम किया. दिल्ली में (पूर्व प्रधानमंत्री) चंद्रशेखर के साथ काम किया. चंद्रशेखरजी के वह चहेते थे. चंद्रशेखरजी के साथ वह उस पद पर थे जहां उनको सब जानकारी थी. चंद्रशेखर इस्तीफा देने वाले थे, यह उनको जानकारी थी. उस समय वह एक अखबार से जुड़े थे लेकिन उन्होंने अपने अखबार तक को भनक नहीं लगने दी कि चंद्रशेखर इस्तीफा देने वाले हैं. उन्होंने अपने पद की गरिमा को रखते हुए गोपनीयता बनाये रखी. इस खबर को अपने अखबार तक में नहीं छापकर वाहवाही नहीं लूटी.
कौन हैं हरिवंश
राज्यसभा में आज एनडीए के उम्मीदवार के रूप में उपसभापति पद पर निर्वाचित हुए हरिवंश सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं और राजनीति में वह जयप्रकाश नारायण के आदर्शों से प्रेरित हैं. उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को जन्मे हरिवंश को जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही मुंबई में उनका ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समूह में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में 1977-78 में चयन हुआ. वह टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में 1981 तक उपसंपादक रहे. उन्होंने 1981 -84 तक हैदराबाद एवं पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की. 1984 में उन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्तूबर तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित ‘रविवार’ साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे. हरिवंश ने वर्ष 1990-91 के कुछ महीनों तक तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम किया. ढाई दशक से अधिक समय तक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक रहे हरिवंश को नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा में भेजा. उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है. हरिवंश ने कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं. इनमें ‘दिसुम मुक्तगाथा और सृजन के सपने’, ‘जोहार झारखंड’, ‘झारखंड अस्मिता के आयाम’, ‘झारखंड सुशासन अभी भी संभावना है’, ‘बिहार रास्ते की तलाश’ शामिल हैं.

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