सावधान !सिर्फ बेटियां ही नहीं, बेटे भी हो सकते हैं यौन शोषण का शिकार, जानें कैसे?

यह एक सच्ची घटना है, कोई किस्सागोई नहीं कि आप पढ़कर इसे दरकिनार कर दें, क्योंकि बच्चे हम-आप सबके घर में हैं और उनकी सुरक्षा हम सबका दायित्व है, तो घटना का विवरण सुनें.

एक चार साल का बच्चा डरा हुआ बुखार से पीड़ित अस्पताल में भरती हुआ. उसके गुदाद्वार (anal region) की त्वचा छीली हुई थी. बच्चे के पिता ने बताया कि उसके स्कूल के दो बड़े बच्चों ने उसका यौन शोषण किया है. एक ने उसे पीटा उसे नीचे झुकाकर पकड़ा और दूसरे से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया. इस घटना से बच्चा इतना डर गया था कि अपने मां-पापा के साथ चिपका रहा, किसी भी बात का जवाब नहीं दे रहा था. जब मनोचिकित्सक ने उससे पूछताछ की तो वह ऐसे खिलौने से डर रहा था जिसमें उसका लिंग दिख रहा था जबकि वह बिना लिंग के खिलौने से खेलने में कंफर्टेबल था. यह मात्र एक उदाहरण हैं, ऐसी कई घटनाएं हमारे आसपास घट रहीं हैं और दोषी और पीड़ित दोनों ही हमारे बीच के ही हैं.

52.94 प्रतिशत लड़के यौन शोषण का शिकार

अभी जबकि पूरा देश मुजफ्फरपुर और देवरिया के शेल्टर होम में हुए दर्दनाक हादसे की आग में चल रहा है. इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर मामले में स्वत: संज्ञान लेकर यह टिप्पणी की -लेफ्ट, राइट, सेंट्रल सब जगह महिलाओं का रेप हो रहा है, यह शर्मनाक स्थिति है और देश में महिलाओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े करता है, लेकिन यहां जो तथ्य चौंकाने वाले हैं वे हैं भारत में लड़कों के यौन शोषण की घटना . वर्ष 2007 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से एक अध्ययन किया था जिसमें यह बात सामने आयी थी कि भारत में 53.22 बच्चे ऐसे हैं जो एक या एक से अधिक रूपों में यौन शोषण का शिकार हुए हैं, जिनमें लड़कों का प्रतिशत 52.94 था, कहने का आशय यह है कि 52.94 प्रतिशत लड़के ऐसे हैं जो यौन शोषण का शिकार हो चुके हैं.

इस अध्ययन का उद्देश्य वैसे बच्चों को मानसिक सहायता पहुंचाना था, जो यौन शोषण के कारण अवसाद में रहते हैं. यौन शोषण किसी भी बच्ची की जिंदगी की एक ऐसी घटना है जिसके दहशत में वह आजीवन रहता है और उससे निकल नहीं पाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO का कहना है कि बचपन में हुए यौन शोषण का असर बच्चे के स्वास्थ्य पर दिखता है, साथ ही उसका विकास प्रभावित होता है.

 

बच्चों की सुरक्षा को लेकर छह सबसे असुरक्षित देश में भारत

भारत में बच्चों की संख्या एक घर में कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत होती है. लेकिन हमारा देश बच्चों के लिए विश्व के छह सबसे असुरक्षित देशों में से एक है. वर्ष 2007 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से अध्ययन किया उसमें यह बात साफ हुई कि 53.22 प्रतिशत बच्चों यौन शोषण का शिकार होते हैं. जिन बच्चों को यौन शोषण झेलना पड़ता है उसमें लड़कों की संख्या 52.94% और लड़कियों की 47.06% है. इस अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि बच्चों के करीबी लोग ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं.

बच्चों का यौन शोषण रोकने के लिए 2012 में एक्ट बना

बच्चों के साथ होने वाली सेक्सुअल एब्यूज को रोकने के लिए वर्ष 2012 में Protection of Children from Sexual Offenses Act कों संसद ने पारित किया. बावजूद इसके देश में बच्चों के साथ यौन हिंसा हो रही है और लड़के भी बड़े पैमाने पर इसके शिकार हैं. NCRB के डाटा के अनुसार बच्चों के खिलाफ देश में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं, वर्ष 2014 में जहां बच्चों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं 89,423 दर्ज हुईं थीं, वहीं 2016 में यह बढ़कर 106,958 हो गयीं.

पुलिस विभाग भी चिंतित

गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस विभाग भी इस बात से सहमत है कि लड़कों के साथ यौन हिंसा देश में लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2017 में मुंबई पुलिस ने एक ट्‌वीट किया था कि यौन हिंसा का जेंडर से कोई लेना-देना नहीं है, यह किसी के साथ भी हो सकता है यही कारण है कि यौन हिंसा के पीड़ितों में से आधे लड़के हैं.

अधिकतर मामले दर्ज ही नहीं होते
हमारे देश में जब किसी लड़के का यौन शोषण होता है तो पुलिस में शिकायत नहीं की जाती बल्कि उसे छुपाया जाता है, परिणाम यह होता है कि बच्चे डिप्रेशन में चले जाते है. वे स्कूल जाने में डरते हैं और कई बार पढ़ाई तक छोड़ देते हैं.


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