पूर्व लोकसभा स्पीकर और दिग्गज सीपीएम नेता सोमनाथ चटर्जी नहीं रहे

सोमनाथ चटर्जी देश के सबसे लंबे वक्त तक सांसद रहे नेताओं में शामिल

चटर्जी ने पहली बार 1971 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए
– सिर्फ एक बार 1984 में जाधवपुर लोकसभा सीट से ममता बनर्जी ने हराया

सोमनाथ चटर्जी के निधन के साथ एक शानदार सांसद और राजनेता देश ने खो दिया है. पूर्व लोकसभा स्पीकर और दिग्गज सीपीएम नेता सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह निधन हो गया है. उन्हें किडनी की बीमारी थी, काफी लंबे समय से वह कोलकाता के अस्पताल में ही भर्ती थे. सोमनाथ चटर्जी 89 साल के थे. वह 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रह चुके थे. सोमनाथ चटर्जी के लिए राष्‍ट्रहित सर्वोपरि रहा. उन्‍होंने दलगत राजनीति का हिस्‍सा होते हुए भी इसे अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया. वह जब तक लोकसभा के स्‍पीकर रहे, सदैव संसद की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहे.

10 बार रहे थे सांसद

माकपा के पूर्व नेता सोमनाथ चटर्जी 10 बार लोकसभा के सांसद रहे थे. वह पश्चिम बंगाल के बर्धमान, जादवपुर और बोलपुर से लोकसभा सांसद रह चुके थे. कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-1 सरकार में 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे. हालांकि, 1984 में जादवपुर में ममता बनर्जी से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था. उन्हें 1996 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिल चुका है.

सोमनाथ चटर्जी पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष भी रहे थे. उस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में उद्योग लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किए. लेकिन चटर्जी जीवन का एक चुनाव पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हार गए थे. 1984 में जादवपुर सीट पर हुए लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तब सीपीएम के इस कद्दावर नेता को हराया था.

यूपीए-1 शासनकाल में उनकी पार्टी सीपीएम की ओर से सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद उनसे स्पीकर पद छोड़ने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. जिस कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. चटर्जी CPI(M) के केंद्रीय समिति के सदस्य रहे थे, और उन्हें प्रकाश करात के धुर विरोधी के रूप में जाना जाता रहा.

बेहद ईमानदार शख्सियत: 

सोमनाथ चटजी उसूलों के पक्‍के और बेहद ईमानदार शख्‍स थे. जब उनका सरकारी कामों के लिए विदेश जाना होता था, तो वह अपने परिजन का पूरा खर्च अपनी जेब से देते थे. इतना ही नहीं स्पीकर की जिम्मेदारी संभालते समय भी उन्होंने अपने सरकारी आवास पर पहले से हो रहे कुछ गैर जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती कर दी थी.

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थापक थे पिता

सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को बंगाली ब्राह्मण निर्मलचन्द्र चटर्जी और वीणापाणि देवी के घर में असम के तेजपुर में हुआ था. उनके पिता एक वकील और राष्ट्रवादी हिन्दू जागृति के समर्थक थे. उनके पिता अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के संस्थापकों में से एक थे.

…जब पार्टी से निकाल दिया था

2008 में भारत-US परमाणु समझौता विधेयक के विरोध में CPM ने तत्कालीन मनमोहन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, उस दौरान सोमनाथ चटर्जी लोकसभा अध्यक्ष थे. पार्टी ने उन्हें स्पीकर पद छोड़ देने के लिए कहा लेकिन वे नहीं माने. इसके बाद सीपीएम ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमनाथ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ‘उन्होंने हमारे संसदीय लोकतंत्र को और मजबूत किया. वह गरीबों और वंचित लोगों की एक मजबूत आवाज थे. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं.’ राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘सभी सांसद पार्टी लाइन से हटकर उनकी प्रशंसा करते थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं.’


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